January 13, 2026

हरिद्वार: अस्पताल के फर्श पर महिला ने दिया बच्चे को जन्म, नर्स की आपत्तिजनक टिप्पणी से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

हरिद्वार: अस्पताल के फर्श पर महिला ने दिया बच्चे को जन्म, नर्स की आपत्तिजनक टिप्पणी से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
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हरिद्वार, 2अक्टूबर2025/दैनिक प्रभातवाणी 

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय अस्पताल में एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना कर दिया गया, जिसके कारण महिला को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। यह घटना न केवल महिला और नवजात के लिए खतरनाक साबित हो सकती थी, बल्कि इसने अस्पताल स्टाफ और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

घटना का विवरण

जानकारी के अनुसार, महिला अचानक प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल पहुंची। अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसे बताया गया कि वहां अभी बेड उपलब्ध नहीं हैं। महिला की स्थिति देखते हुए उसने जल्दबाजी में फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान अस्पताल की नर्सों में से एक ने reportedly आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे अस्पताल प्रशासन और स्टाफ की संवेदनशीलता पर सवाल उठ गए।

स्थानीय लोगों और अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने घटना की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर साझा की, जिससे मामला तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने राज्य और केंद्र सरकार की मातृ-स्वास्थ्य योजनाओं और अस्पतालों में तत्काल सुविधाओं की स्थिति पर व्यापक चर्चा छेड़ दी।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने यह भी कहा कि महिला और नवजात की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।

हालांकि, इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के अंदर प्रशिक्षण और संवेदनशीलता की कमी को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में बेड की कमी या स्टाफ की लापरवाही सीधे तौर पर महिलाओं और नवजात की जान को जोखिम में डाल सकती है।

विशेषज्ञों का बयान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पतालों में तत्काल और सुरक्षित सुविधा होना अत्यंत आवश्यक है। हरिद्वार जैसी धार्मिक और जनसंख्या घनी जगहों में ऐसे आपातकालीन मामलों के लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार किए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि स्टाफ का नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता विकास कार्यक्रम ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकता है।

समाज और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ। लोग अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त बेड और इमरजेंसी सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए। स्वास्थ्य और मातृ सुरक्षा पर यह घटना एक चेतावनी की तरह है कि अस्पताल व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही, उन्होंने अस्पताल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की है।

दैनिक प्रभातवाणी

हरिद्वार की यह घटना केवल एक व्यक्तिगत दुर्भाग्य नहीं है, बल्कि यह राज्य और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर और सुरक्षित सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार और अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही, अस्पताल स्टाफ की संवेदनशीलता और प्रशिक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

यह घटना राज्य और पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि मातृ और शिशु सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर सुधार और जागरूकता जरूरी है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।