₹1,100 करोड़ का ADB–भारत सरकार समझौता: टिहरी झील बनेगी सतत पर्यटन की नई पहचान

नई दिल्ली/टिहरी, 15 सितंबर 2025/दैनिक प्रभातवाणी
नई दिल्ली। उत्तराखंड के टिहरी झील क्षेत्र में सतत और जलवायु-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने सोमवार को लगभग ₹1,100 करोड़ (135 मिलियन डॉलर) के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि स्थानीय विकास, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को भी मजबूत करना है।
टिहरी झील का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व
टिहरी झील का निर्माण टिहरी बांध परियोजना के तहत हुआ था। यह एशिया का सबसे ऊंचा और बड़ा बांध है, जिसकी वजह से पुराना टिहरी शहर जलमग्न हो गया और हजारों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा। हालांकि, इस झील ने उत्तर भारत को ऊर्जा और पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पिछले दो दशकों में टिहरी झील केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य सरकार ने इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाएं भी शुरू कीं। वॉटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, कायाकिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियों ने इस क्षेत्र को धीरे-धीरे लोकप्रिय बनाया।
समझौते के मुख्य उद्देश्य
ADB–भारत सरकार समझौते का मुख्य मकसद टिहरी झील क्षेत्र को सतत और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन मॉडल में बदलना है।
बुनियादी ढांचा विकास: बेहतर सड़कें, घाट, पर्यटक सुविधाएं और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था तैयार होगी।
सतत पर्यटन को बढ़ावा: निर्माण कार्य इस तरह होगा कि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। सोलर पावर और ऊर्जा दक्ष तकनीकें इस्तेमाल की जाएंगी।
आपदा प्रबंधन: टिहरी झील क्षेत्र भूस्खलन और अचानक बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है। इस परियोजना में आधुनिक आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किए जाएंगे।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी: महिला समूहों, युवाओं और उद्यमियों को प्रशिक्षण और रोजगार दिया जाएगा, ताकि वे सीधे पर्यटन से जुड़े व्यवसायों में भागीदार बन सकें।
स्थानीय समुदाय को मिलने वाले लाभ
इस परियोजना से टिहरी झील और आसपास के इलाकों—टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और पौड़ी—को सीधा फायदा होगा।
रोज़गार के अवसर: युवाओं को होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे, गाइड और एडवेंचर स्पोर्ट्स में रोजगार मिलेगा।
महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों को पर्यटन से जुड़े उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने का मौका मिलेगा।
स्थानीय कारोबार को प्रोत्साहन: हस्तशिल्प, लोककला, फूड प्रोसेसिंग और पारंपरिक उत्पादों को बाजार मिलेगा।
आर्थिक विकास: पर्यटन ढांचे के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन की समस्या कम होगी।
सरकार और ADB का दृष्टिकोण
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस समझौते को “ग्रीन ग्रोथ” की दिशा में बड़ा कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भारत की जलवायु-अनुकूल रणनीति और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ी है।
ADB के भारत निदेशक का कहना है कि टिहरी को एक “हिमालयी सतत पर्यटन मॉडल” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे अन्य पर्वतीय राज्य भी प्रेरणा ले सकेंगे। उनका मानना है कि यह परियोजना केवल पर्यटन पर नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास पर केंद्रित होगी।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ और आशंकाएँ
हालांकि इस परियोजना का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन पर्यावरणविदों ने कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा किया है।
अधिक पर्यटक आने से कचरा और प्रदूषण बढ़ सकता है।
निर्माण कार्य से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने की संभावना है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले से ही हिमालयी क्षेत्रों में दिख रहे हैं। ऐसे में पर्यटन को नियंत्रित और सतत रूप में लागू करना ही सफलता की कुंजी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया गया तो यह परियोजना क्षेत्र के लिए लाभ से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर आधारित है। ADB का यह निवेश सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है।
राज्य सरकार इसे अपनी नीति और विज़न की सफलता के रूप में पेश करेगी।
विपक्ष का कहना है कि परियोजना के नाम पर स्थानीय लोगों की जमीन और अधिकारों से समझौता नहीं होना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि परियोजना तभी सफल होगी जब स्थानीय लोगों को पूरी भागीदारी मिलेगी।
भविष्य की संभावनाएँ
टिहरी झील क्षेत्र में ADB की मदद से कई नई संभावनाएँ खुलेंगी।
अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन: यहां वॉटर स्पोर्ट्स के अंतरराष्ट्रीय इवेंट कराए जा सकते हैं।
संस्कृति और कला का प्रचार: स्थानीय लोककला और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
पलायन पर रोक: जब युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा तो पलायन की समस्या भी कम होगी।
संपूर्ण राज्य पर असर: टिहरी मॉडल सफल हुआ तो इसे नैनीताल, मसूरी और चारधाम मार्ग जैसे अन्य पर्यटन स्थलों पर भी लागू किया जा सकता है।
दैनिक प्रभातवाणी
एशियन डेवलपमेंट बैंक और भारत सरकार के बीच हुआ यह ₹1,100 करोड़ का ऋण समझौता केवल एक आर्थिक पहल नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है।
टिहरी झील को सतत और जलवायु-अनुकूल पर्यटन केंद्र बनाना स्थानीय लोगों को रोजगार, राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती और पर्यावरण को संतुलन देने की दिशा में अहम साबित होगा। हालांकि, इस परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितना पारदर्शी और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से लागू किया जाता है।
टिहरी झील, जिसने एक समय विस्थापन और दर्द की कहानी लिखी थी, अब विकास, रोज़गार और सतत पर्यटन की नई गाथा गढ़ने जा रही है।