Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो | उत्तराखंड | 26 जुलाई 2025उत्तराखंड के ‘घोस्ट विलेज’ अब बनेंगे लग्ज़री वेडिंग डेस्टिनेशनउत्तराखंड के वीरान हो चुके गांवों को अब एक नया जीवन मिलने जा रहा है। सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है जिसके तहत राज्य के “घोस्ट विलेज” यानी पूरी तरह खाली हो चुके गांवों को लग्ज़री वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यह योजना राज्य में न केवल पलायन रोकने का एक प्रयास है, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय रोजगार को भी पुनर्जीवित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।क्या हैं “घोस्ट विलेज”?उत्तराखंड में करीब 550 गांव ऐसे हैं जहाँ अब कोई स्थायी निवासी नहीं बचा है। इनमें से अधिकतर गांव पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ से वर्षों से लोग रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के चलते मैदानों की ओर पलायन कर गए हैं। ये गांव समय के साथ वीरान हो चुके हैं और अब इन्हें “घोस्ट विलेज” कहा जाता है।इन गांवों में न स्कूल हैं, न अस्पताल, और न ही बुनियादी सुविधाएँ। घर खंडहर बन चुके हैं, खेत बंजर पड़े हैं और सड़कों तक का कोई नामोनिशान नहीं है।सरकार की नई योजना: ‘घोस्ट विलेज टू वेडिंग विलेज’राज्य सरकार ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का फैसला किया है। पर्यटन और ग्राम्य विकास विभाग मिलकर इन वीरान गांवों को लग्ज़री वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करेंगे।योजना की मुख्य बातें:शुरुआत 10 गांवों से की जाएगी, जो पर्यटन और पहुंच के लिहाज़ से उपयुक्त हैं।हर गांव में बुनियादी ढांचा (सड़क, पानी, बिजली, इंटरनेट) को प्राथमिकता दी जाएगी।पारंपरिक पहाड़ी स्थापत्य शैली में वेडिंग स्थल बनाए जाएंगे ताकि संस्कृति भी झलके।निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए PPP मॉडल (Public-Private Partnership) अपनाया जाएगा।स्थानीय लोगों को पर्यटन, कैटरिंग, फोटोग्राफी, सजावट, हॉस्पिटैलिटी में प्रशिक्षण दिया जाएगा।क्यों चुने गए वेडिंग डेस्टिनेशन?पिछले कुछ वर्षों में डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन तेज़ी से बढ़ा है। भारत में उदयपुर, जयपुर, गोवा और केरल जैसे स्थान पहले से इस श्रेणी में लोकप्रिय हैं। अब उत्तराखंड इस सूची में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है।उत्तराखंड का प्राकृतिक सौंदर्य, हिमालय की गोद, देवस्थल, शांत वातावरण, और पहाड़ी संस्कृति — ये सब इसे एक आदर्श वेडिंग लोकेशन बनाते हैं। इसके अलावा, यह प्रयास पर्यटन को सीजनल से स्थायी बनाने में मदद करेगा।किन गांवों में होगी शुरुआत?फिलहाल जिन 10 गांवों को पहले चरण में शामिल किया गया है, उनमें से कुछ हैं:क्वारी गांव (चमोली)माणा गांव के पास का वीरान क्षेत्र (बद्रीनाथ मार्ग)सौर घाटी के कुछ गांव (उत्तरकाशी)धर्मा घाटी, दारमा घाटी के कुछ गांव (पिथौरागढ़)रैथल गांव के समीप क्षेत्र (गंगोत्री वैली)इन स्थानों पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित है, जो एक अनोखा अनुभव प्रदान करती है।आर्थिक लाभ: गांवों में लौटेगा जीवनइस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि स्थानीय लोगों को गांवों में ही रोज़गार मिलेगा। होटल, केटरिंग, सजावट, परिवहन, और अन्य सेवाओं के ज़रिये न केवल रोज़गार बढ़ेगा बल्कि स्थानीय उत्पादों (जैसे कि मंडुवा, झंगोरा, ऊन, शिल्पकला आदि) को बाज़ार मिलेगा।क्या स्थानीय लोग लौटेंगे?जो लोग दशकों पहले पलायन कर चुके हैं, वे अब इन गांवों में वापसी की सोच सकते हैं यदि उन्हें आय का स्थायी स्रोत और सुविधाएँ मिलें। कई प्रवासी परिवारों ने राज्य सरकार से संपर्क कर “पुनर्निवास और निवेश” में दिलचस्पी दिखाई है।सांस्कृतिक संवर्धन भीये लग्ज़री वेडिंग वेन्यू सिर्फ भव्य सजावट तक सीमित नहीं रहेंगे। यहां पहाड़ी संगीत, पारंपरिक नृत्य, स्थानीय खानपान और रीति-रिवाज़ों को भी वेडिंग कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे सांस्कृतिक पहचान भी जीवित रहेगी।विशेषज्ञों की रायडॉ. रश्मि बिष्ट (विकास अर्थशास्त्री):“घोस्ट विलेज की चुनौती को अवसर में बदलने के लिए यह योजना एक पथप्रदर्शक मॉडल हो सकती है। यदि इसे सही नियोजन और स्थानीय भागीदारी से लागू किया जाए, तो यह गांवों को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय उदाहरण बन सकती है।”हर्षवर्धन बिष्ट (ट्रैवल ब्लॉगर):“पहाड़ों में वेडिंग डेस्टिनेशन एक अनोखी अवधारणा है। पर्यटक आजकल शांत और प्राकृतिक वातावरण को प्राथमिकता देते हैं। अगर बुनियादी सुविधाएँ मिल जाएं, तो उत्तराखंड अगला ‘उदयपुर’ बन सकता है।”चुनौतियाँ भी कम नहींबर्फबारी और भूस्खलन जैसे भौगोलिक जोखिमदूर-दराज़ इलाकों तक सड़क और इंटरनेट पहुँचानापर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की संतुलित निगरानीनिजी निवेशकों को आकर्षित करना, खासकर प्रारंभिक चरण मेंसरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक सस्टेनेबल इको-वेडिंग मॉडल की रूपरेखा तैयार की है, जहाँ पर्यावरणीय नियमों का सख़्ती से पालन होगा।आगे का रोडमैप2025 के अंत तक 10 गांवों में बुनियादी ढाँचे का कार्य पूर्ण करना2026 में पहली Eco-Friendly Wedding Ceremonies आयोजित करने का लक्ष्य2027 तक 50 और गांवों को योजना में जोड़नास्थानीय लोगों को हॉस्पिटैलिटी स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग देनानिष्कर्ष: घोस्ट विलेज से गोल्डन विलेज की ओरउत्तराखंड की यह पहल एक नई सोच को दर्शाती है – “जहाँ गांव खाली हैं, वहाँ जीवन लौटाना भी संभव है।” लग्ज़री वेडिंग स्थल की योजना से न केवल आर्थिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान होगा, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी फिर से बनेगा — अपना गांव, अपनी धरती, अपना भविष्य।यदि यह योजना सफल होती है, तो न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश के अन्य पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्र भी इस मॉडल को अपना सकते हैं। Post Views: 90 Post navigationकेदारनाथ यात्रा मार्ग पर संकट: गॉरिकुंड में पानी में मिला 4.9 मिलियन फैकल कोलिफॉर्म, तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य हुआ भगवद गीता श्लोक पाठ: शिक्षा में भारतीय संस्कृति की नई शुरुआत