उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों में लापता तीन ट्रैकर्स की तलाश जारी, SDRF-NDRF और ITBP चला रही संयुक्त रेस्क्यू मुहिम
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देहरादून, दैनिक प्रभातवाणी। उत्तराखंड के संवेदनशील और दुर्गम ट्रेकिंग रूटों पर लापता हुए तीन ट्रैकर्स की तलाश के लिए राज्य और केंद्रीय एजेंसियों ने बड़े स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF) तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की संयुक्त टीमें लगातार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बीच ट्रैकर्स का पता लगाने में जुटी हुई हैं। पहाड़ों में लगातार बदल रहे मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार लापता ट्रैकर्स की खोज के लिए कई टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है। जवान घने जंगलों, गहरी खाइयों, ऊंचे पहाड़ी दर्रों और संवेदनशील ट्रेकिंग मार्गों पर पैदल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। आधुनिक तकनीक की मदद लेते हुए ड्रोन कैमरों, सैटेलाइट फोन और विशेष लोकेशन ट्रैकिंग उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित सुराग तक जल्द पहुंचा जा सके।

रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौसम बना हुआ है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का दौर जारी है। कई स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 70 से 76 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई है। खराब मौसम के कारण दृश्यता कम हो रही है और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे बचाव दलों की गति प्रभावित हो रही है।

अधिकारियों के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ट्रैकर्स के मोबाइल फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाने में समय लग रहा है। कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित होने के कारण रेस्क्यू टीमों को सैटेलाइट आधारित उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

प्रशासन ने मौसम में सुधार होने पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवाई सर्वेक्षण की भी तैयारी कर रखी है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने चॉपर को अलर्ट मोड पर रखा है ताकि मौसम साफ होते ही संवेदनशील क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया जा सके और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव सामग्री पहुंचाई जा सके।

इस बीच उत्तराखंड पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने ट्रेकर्स तथा पर्वतारोहियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी ट्रेकिंग रूट पर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है। साथ ही बिना अनुभवी स्थानीय गाइड या पोर्टर के दुर्गम और अपरिचित मार्गों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व मौसम की अस्थिरता के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक मौसम खराब होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को नजरअंदाज करना गंभीर खतरे को आमंत्रित कर सकता है।

फिलहाल पूरा प्रशासन और बचाव दल लापता ट्रैकर्स की सुरक्षित तलाश में जुटा हुआ है। परिजन और स्थानीय लोग भी लगातार अभियान की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि मौसम में सुधार होने के साथ ही सर्च ऑपरेशन को और तेज किया जाएगा तथा जल्द कोई सकारात्मक सूचना सामने आ सकती है।

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