Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 6 अप्रैल 2026देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियाँ तेज होती जा रही हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अब राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीति के तहत दलबदल के दूसरे चरण की तैयारी में है। पार्टी ने इस चरण में शामिल होने वाले नेताओं की सूची भी तैयार कर ली है और माना जा रहा है कि जल्द ही 12 बड़े नेता कांग्रेस में शामिल होंगे।पहले चरण में कांग्रेस में शामिल हुए छह नेताओं ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। इनमें पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, भीमलाल आर्य, रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल और मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता, लाखन सिंह नेगी शामिल थे। इस कार्यक्रम ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया और यह संदेश दिया कि पार्टी चुनाव से पहले अपनी स्थिति सुदृढ़ कर रही है।हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अवकाश लेने की खबर ने कांग्रेस में असहज स्थिति पैदा कर दी थी। राजनीतिक हलकों में इसे संजय नेगी की ज्वॉइनिंग को लेकर नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया। बाद में वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए और पार्टी ने सतर्कता के साथ आगे की रणनीति तैयार की।अब कांग्रेस की नजर दूसरी खेप पर है, जिसमें 12 नेताओं को शामिल करने की तैयारी चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि बीजेपी के कई सिटिंग विधायक भी कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अपने कार्यकाल और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अभी खुद को रोक रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुल 18 नेताओं ने शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिनमें से 6 पहले ही सदस्य बन चुके हैं। शेष 12 नेताओं की सूची हाईकमान को भेजी जा रही है। जैसे ही प्रदेश प्रभारी की अनुमति मिलेगी, इन्हें कांग्रेस में शामिल कराया जाएगा।”साथ ही, कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का पांच दिवसीय उत्तराखंड दौरा इस प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। उनके दौरे के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात के साथ ही कुछ नेताओं की ज्वॉइनिंग भी कराई जा सकती है, जिससे कांग्रेस को चुनाव से पहले एक मजबूत राजनीतिक संदेश मिलेगा।नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि बीजेपी के कई बड़े नेता कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, और आने वाले समय में ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि वे दल-बदल को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर दावे नहीं करना चाहते।इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि उत्तराखंड की राजनीतिक दिशा आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से तेजी से बदल रही है। कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने और राज्य में चुनावी माहौल बनाने के लिए सक्रिय रूप से रणनीति लागू कर रही है, जिससे राजनीतिक हलचल और दल-बदल की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। Post Views: 4 Post navigation14 अप्रैल को होगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, सांसद ने सुझाया बाबा साहेब अंबेडकर का नाम उत्तराखंड में सभी स्कूलों के लिए एक समान टाइम टेबल लागू, पीरियड्स का समय भी तय