Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 7 अप्रैल 2026 देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक समान समय सारणी लागू करने का निर्णय लिया है। अब न केवल स्कूलों के खुलने और बंद होने का समय तय होगा, बल्कि प्रार्थना सभा और सभी पीरियड की अवधि भी निश्चित कर दी गई है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के आदेश के तहत यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में अनिवार्य होगी। लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि कई निजी स्कूल अपनी सुविधानुसार स्कूल टाइमिंग तय करते हैं। कुछ स्कूल बहुत जल्दी छात्रों को बुला लेते हैं, जबकि कुछ देर तक कक्षाएं चलाते हैं, जिससे बच्चों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी, निजी, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के लिए ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन समय सारणी जारी की है। ग्रीष्मकालीन समय सारणी (1 अप्रैल से 30 सितंबर): प्रार्थना सभा: 7:45 बजे – 8:05 बजे (20 मिनट) 1st पीरियड: 8:05 – 8:45 बजे 2nd पीरियड: 8:45 – 9:25 बजे 3rd पीरियड: 9:25 – 10:05 बजे 4th पीरियड: 10:05 – 10:45 बजे मध्यांतर: 10:45 – 11:25 बजे 5th पीरियड: 11:25 – 12:05 बजे 6th पीरियड: 12:05 – 12:45 बजे 7th पीरियड: 12:45 – 1:25 बजे 8th पीरियड: 1:25 – 2:05 बजे शीतकालीन समय सारणी (1 अक्टूबर से 31 मार्च): प्रार्थना सभा: 8:50 – 9:10 बजे 1st पीरियड: 9:10 – 9:50 बजे 2nd पीरियड: 9:50 – 10:30 बजे 3rd पीरियड: 10:30 – 11:10 बजे 4th पीरियड: 11:10 – 11:50 बजे मध्यांतर: 11:50 – 12:30 बजे 5th पीरियड: 12:30 – 1:10 बजे 6th पीरियड: 1:10 – 1:50 बजे 7th पीरियड: 1:50 – 2:30 बजे 8th पीरियड: 2:30 – 3:10 बजे शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पीरियड की अवधि 40 मिनट होगी और सभी स्कूलों को इसी के अनुसार कक्षाएं संचालित करनी होंगी। सरकार का मानना है कि इस एक समान समय सारणी से पूरे प्रदेश में पढ़ाई का ढांचा व्यवस्थित होगा और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। हालांकि, शिक्षा विभाग को इस आदेश का पालन कराना आसान नहीं माना जा रहा है, खासकर बड़े निजी स्कूलों में। कई निजी संस्थान अपनी सुविधानुसार समय सारणी चला रहे हैं, जिन्हें अब सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार समायोजित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विभाग का कहना है कि आदेश का उद्देश्य स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाना और शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित बनाना है। यदि सभी स्कूल एक समान समय सारणी अपनाते हैं तो इससे छात्रों की पढ़ाई में निरंतरता आएगी और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। Post Views: 10 Post navigation उत्तराखंड में चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल: कांग्रेस में दलबदल की दूसरी खेप तैयार देहरादून को जाम से राहत देने की तैयारी, शहर में लागू हुआ स्मार्ट ट्रैफिक प्लान