March 1, 2026

उत्तराखंड में जनगणना 2026 की तैयारियाँ तेज, प्रशासन ने कसी कमर

देहरादून | उत्तराखंड | 10 फरवरी 2026 | दैनिक प्रभातवाणी
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उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाली जनगणना 2026 के पहले चरण को लेकर प्रशासनिक तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य स्तर पर जनगणना कार्य को समयबद्ध और व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में जनगणना से जुड़े प्रत्येक पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना का पहला चरण न केवल आंकड़ों के संग्रह की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भविष्य की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की नींव भी तय करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा फील्ड स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण व्यवस्था, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

बैठक में यह भी बताया गया कि जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मोबाइल ऐप, ऑनलाइन डेटा एंट्री और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि किसी भी स्तर पर त्रुटि या देरी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। साथ ही, दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में जनगणना कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए विशेष रणनीति अपनाने पर भी सहमति बनी।

अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना कार्य में आम जनता का सहयोग बेहद आवश्यक है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को साथ जोड़ने तथा लोगों को सही और पूर्ण जानकारी देने के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि जनगणना के आंकड़े राज्य के सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में जनगणना से जुड़े कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, संसाधनों की उपलब्धता और फील्ड प्लानिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जनगणना 2026 का पहला चरण पूरी पारदर्शिता, सटीकता और समयबद्धता के साथ संपन्न हो, ताकि उत्तराखंड के विकास से जुड़ी नीतियों को ठोस और विश्वसनीय आंकड़ों का आधार मिल सके।