Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में इस वर्ष जंगलों की आग ने सरकार और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। गर्मी बढ़ने के साथ ही राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस फायर सीजन में अब तक 394 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 331 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर आग ने जंगलों के साथ-साथ वन्यजीवों और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अब वनाग्नि रोकने के लिए सख्त और नई रणनीति तैयार की है। वन विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई जंगल शामिल हैं। विशेष रूप से चीड़ के जंगलों में आग तेजी से फैल रही है क्योंकि गर्मी के मौसम में सूखी पत्तियां और घास आसानी से आग पकड़ लेती हैं। कई इलाकों में आग बुझाने के लिए वन कर्मियों को घंटों तक कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्गम रास्तों और तेज हवाओं के कारण आग पर नियंत्रण पाना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वनाग्नि रोकने वालों को मिलेगा इनाम, चीड़ की पत्तियां इकट्ठा करने पर भी इंसेंटिव स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने अब वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग करने वाले लोगों और टीमों को प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाए तो जंगलों में आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी योजना के तहत जंगलों की आग बुझाने या समय रहते सूचना देने वाले लोगों को इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाली वन विभाग की टीमों को भी सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। सरकार ने चीड़ की सूखी पत्तियों यानी पाइन नीडल्स को इकट्ठा करने के लिए भी नई योजना लागू की है। इसके तहत लोगों को प्रति किलो पत्तियां इकट्ठा करने पर ₹1 का इंसेंटिव दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि चीड़ की सूखी पत्तियां जंगलों में आग फैलने का सबसे बड़ा कारण बनती हैं क्योंकि ये बेहद जल्दी आग पकड़ लेती हैं। यदि इन्हें समय रहते जंगलों से हटाया जाए तो वनाग्नि की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि इस योजना से दोहरा फायदा होगा। एक ओर जंगलों में आग की घटनाएं कम होंगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को अतिरिक्त रोजगार का अवसर भी मिलेगा। कई स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय युवाओं को इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चला रहा है ताकि लोग जंगलों में आग लगाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएं। ड्रोन कैमरों और आधुनिक तकनीक का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है ताकि आग लगने की सूचना समय रहते मिल सके। वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में फायर लाइन बनाने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान के कारण उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर होती जा रही हैं। जंगलों की आग केवल पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि इससे जैव विविधता, वन्यजीव और पर्यावरण संतुलन पर भी गहरा असर पड़ता है। कई बार आग की वजह से गांवों और मानव बस्तियों तक खतरा पहुंच जाता है। राज्य सरकार की नई योजना को वनाग्नि नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बना रहा तो आने वाले समय में जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल वन विभाग पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से भी जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की जा रही है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मियां तेज, बीजेपी और कांग्रेस ने शुरू की 2027 की बड़ी तैयारी गंगोत्री हाईवे पर घायल युवक की पुलिस और आईटीबीपी जवानों ने बचाई जान, पेश की मानवता की मिसाल