Spread the loveदेहरादून। दैनिक प्रभातवाणी । उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। पर्वतीय जिलों में जगह-जगह भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कें धंसने की घटनाओं के चलते चारधाम यात्रा समेत सामान्य यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC), लोक निर्माण विभाग (PWD), सीमा सड़क संगठन (BRO), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा जिला प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। 100 से अधिक सड़कें बंद, कई क्षेत्रों का संपर्क टूटा भारी वर्षा और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण राज्यभर में छोटे-बड़े संपर्क मार्गों सहित 100 से अधिक सड़कें (करीब 107–115 मार्ग) पूरी तरह बंद हो गई हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम साफ होते ही प्राथमिकता के आधार पर सभी प्रमुख मार्गों को खोलने का प्रयास किया जा रहा है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बाधित उत्तरकाशी जिले के नालूपानी क्षेत्र में भारी भूस्खलन के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े पत्थर गिरने के कारण मार्ग खोलने में कठिनाई आ रही है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। टिहरी में NH-707A पर भूस्खलन, भवनों को नुकसान टिहरी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-707A पर भी भारी भूस्खलन हुआ है। सड़क किनारे स्थित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रेस्टोरेंटों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करते हुए लोगों से अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है। चारधाम यात्रा पर असर लगातार बारिश के कारण चारधाम यात्रा प्रभावित हुई है। गंगोत्री मार्ग बंद होने से यात्रियों की आवाजाही रोक दी गई है। वहीं बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर भी प्रशासन विशेष निगरानी बनाए हुए है। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर बढ़ने से अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और सड़क धंसने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने यात्रियों से स्पष्ट कहा है कि जब तक मौसम सामान्य नहीं हो जाता, तब तक जोखिम उठाकर यात्रा आगे न बढ़ाएं। यात्रियों के लिए प्रशासन की महत्वपूर्ण एडवाइजरी जहां सुरक्षित स्थान पर हैं, वहीं ठहरें और बिना प्रशासन की अनुमति आगे यात्रा न करें। होटल, धर्मशाला, आश्रम अथवा प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में ही रुकें। रात के समय पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से बचें। नदी, नाले और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें। मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करें। राहत एवं बचाव कार्य जारी राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, SDRF, NDRF, BRO और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य चला रहे हैं। जहां भी यात्री फंसे हैं, वहां भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। सड़कों से मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। इन नंबरों पर लें सहायता यदि आप चारधाम यात्रा पर हैं या किसी प्रभावित क्षेत्र में फंसे हुए हैं, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस कंट्रोल रूम या 1077 (राज्य आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन) पर संपर्क करें। यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित जिले के प्रशासन से मार्ग की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। प्रशासन की अपील प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और मौसम पूरी तरह सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें। पर्वतीय क्षेत्रों में अगले कुछ समय तक भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में भारी बारिश का असर: 10 जिलों में स्कूल बंद, भर्ती परीक्षाएं प्रभावित, प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति पर फिर उठे सवाल: RTI में दान में मिले वाहनों का मामला गरमाया, हाईटेक एंबुलेंस और टेंपो ट्रैवलर को लेकर बढ़ी पारदर्शिता की मांग