Spread the love देहरादून। कर्णप्रयाग में हाल ही में हुए तनावपूर्ण विवाद के बीच शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में सिख समुदाय की ओर से बड़ा संदेश सामने आया है। सिख समुदाय के प्रमुख जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के बाद सभी श्रद्धालुओं से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था और गुरु-चरणों में हाजिरी होना चाहिए तथा किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहना चाहिए, जिससे क्षेत्र की शांति और भाईचारे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित बैठक में कर्णप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि 25 जून को आयोजित होने वाली संगत में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालु किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी या धरने में भाग न लें। उन्होंने श्रद्धालुओं से शांति, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा कि गुरुओं की शिक्षाएं सद्भाव, सेवा और भाईचारे का संदेश देती हैं, इसलिए सभी श्रद्धालुओं को इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिख प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व को प्रदेश की शांति और सौहार्द बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी तथा प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन और स्थानीय समुदाय के सहयोग से कर्णप्रयाग-रुद्रप्रयाग क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास तेज किए गए हैं। दोनों पक्षों ने आपसी संवाद और सहयोग के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने तथा क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। यह अपील ऐसे समय में सामने आई है, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेमकुंड साहिब और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे में यात्रा मार्ग पर शांति, सुरक्षा और सामाजिक समरसता बनाए रखना प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की साझा जिम्मेदारी बन गई है। सिख समुदाय की ओर से शांति और संयम का यह संदेश निश्चित रूप से क्षेत्र में विश्वास बहाली और भाईचारे के वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Post Views: 2 Post navigation संविधान हत्या दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित, कहा- आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय कुल्हाल बॉर्डर पर रोके गए निहंग सिख, पांवटा साहिब में वार्ता विफल होने के बाद बढ़ी सतर्कता