चंद्रग्रहण के कारण हरकी पैड़ी पर बदला गंगा आरती का समय, रात 8 बजे होगी आरती, जानिए सूतक काल और नियम
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हरिद्वार। वर्ष 2026 का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण 3 मार्च मंगलवार को लगने जा रहा है, जिसके चलते धर्मनगरी हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियों के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। विश्व प्रसिद्ध हर की पैड़ी पर होने वाली संध्याकालीन गंगा आरती का समय भी परिवर्तित कर दिया गया है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस निर्णय की जानकारी श्री गंगा सभा की ओर से आधिकारिक रूप से दी गई है।

चंद्रग्रहण के सूतक काल को ध्यान में रखते हुए हरकी पैड़ी स्थित मंदिरों के कपाट सुबह निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाएंगे। प्रशासन और गंगा सभा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बदले हुए समय के अनुसार ही गंगा आरती में शामिल होने पहुंचें।

सुबह 6:20 बजे बंद होंगे मंदिरों के कपाट

श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल लागू होने से पहले ही हरकी पैड़ी क्षेत्र के सभी मंदिरों के कपाट सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर बंद कर दिए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक लगने के बाद मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं।

जानकारी के अनुसार सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस बार सूतक मंगलवार सुबह 9 बजकर 17 मिनट से प्रभावी माना जा रहा है। इस अवधि में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने की मनाही रहती है।

रात 8 बजे होगी संध्याकालीन गंगा आरती

सामान्य दिनों में हरकी पैड़ी पर संध्याकालीन गंगा आरती शाम 6 बजकर 20 मिनट पर आयोजित होती है, लेकिन चंद्रग्रहण के कारण इस समय में बदलाव किया गया है। ग्रहण समाप्त होने और घाटों की शुद्धि एवं सफाई के बाद गंगा आरती रात 8 बजे आयोजित की जाएगी।

ग्रहण का समापन शाम लगभग 6:47 बजे माना जा रहा है। इसके बाद घाटों और मंदिर परिसर की विधिवत सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके पश्चात श्रद्धालु गंगा आरती में शामिल हो सकेंगे।

श्रद्धालुओं से समय का विशेष ध्यान रखने की अपील

गंगा सभा की ओर से श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे पुराने समय के अनुसार शाम 6:20 बजे हरकी पैड़ी न पहुंचें, बल्कि रात 8 बजे आयोजित होने वाली आरती के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण काल को विशेष आध्यात्मिक समय माना जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और मूर्तियों का स्पर्श या नियमित पूजा नहीं की जाती।

उन्होंने बताया कि ग्रहण के समय पहले से बना भोजन ग्रहण करना उचित नहीं माना जाता। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है और उन्हें घर के भीतर रहने की परंपरागत सलाह दी जाती है। ग्रहण काल में जप, ध्यान और ईश्वर स्मरण को शुभ माना गया है।

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान का महत्व

धार्मिक परंपराओं के अनुसार चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर शुद्धि करना आवश्यक माना जाता है। इसके बाद ही भोजन या अन्य दैनिक कार्य प्रारंभ किए जाते हैं। मंदिरों में भी ग्रहण समाप्ति के बाद विधि-विधान से पुनः पूजा-अर्चना शुरू की जाएगी।

क्यों लगता है चंद्रग्रहण?

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस स्थिति में चंद्रमा का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है, जिसे चंद्रग्रहण कहा जाता है। इस बार का ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, जिससे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से इसका विशेष महत्व माना जा रहा है।