Spread the love दैनिक प्रभातवाणी | 31 जुलाई 2025तकनीकी सुधार की दिशा में उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, डिजिटल फोरेंसिक लैब और जियोथर्मल नीति को मिली हरी झंडीउत्तराखंड सरकार ने राज्य के प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को आधुनिक और मज़बूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 9 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई। इनमें सबसे अहम है – डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना, उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025, सेतु भार वहन क्षमता जांच इकाई की स्थापना और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियमों में संशोधन। डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला: साइबर अपराधों की जांच में मददप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों और तकनीकी अपराधों की जाँच को तेज़ और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से डिजिटल फॉरेंसिक लैब की स्थापना का निर्णय लिया गया है। यह लैब विशेष रूप से डिजिटल साक्ष्यों की जांच, डेटा रिकवरी, मोबाइल और कंप्यूटर से सबूत इकट्ठा करने जैसे कार्यों में सक्षम होगी। इससे न सिर्फ़ पुलिस की जांच में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कोर्ट में पेश किए जाने वाले डिजिटल सबूतों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025: अक्षय ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदमराज्य सरकार ने उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025 को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर गर्म जलस्रोतों (Hot Springs) के माध्यम से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है। इससे पर्यावरण पर दबाव कम होगा और राज्य को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। नीति के तहत निजी और सार्वजनिक निवेशकों को प्रोत्साहन देने की योजना है।सेतु भार वहन क्षमता जांच इकाई: पुलों की सुरक्षा होगी सुनिश्चितराज्य के सभी पुलों की सुरक्षा जांच के लिए सेतु भार वहन क्षमता (Bridge Load Testing) इकाई की स्थापना की जाएगी। इसका कार्य पुलों की भार क्षमता, संरचना की मजबूती और उनके रखरखाव की आवश्यकता की वैज्ञानिक जांच करना होगा। यह इकाई सड़कों और पुलों की दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियमों में संशोधनराज्य सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए इसे और अधिक पारदर्शी व जनहितकारी बनाने का फैसला किया है। नए नियमों के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों में मिलने वाले राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और रोजगार के अवसरों के लिए किया जाएगा। यह निर्णय खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्रों के संतुलित विकास में सहायक सिद्ध होगा। राज्य के विकास को नई दिशासरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों से साफ़ संकेत मिलते हैं कि उत्तराखंड तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक क्षेत्र में लंबी दूरी की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। डिजिटल फोरेंसिक लैब और जियोथर्मल ऊर्जा नीति जैसे कदम 21वीं सदी के स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल की ओर संकेत करते हैं।दैनिक प्रभातवाणी :उत्तराखंड मंत्रिमंडल के ये निर्णय राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और प्रशासनिक रूप से पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के ज़रिए राज्य में विकास की रफ्तार और तेज़ होने की उम्मीद है। नवीनतम अपडेट के लिए जुड़े रहें: dainikprbhatvani.com Post Views: 41 Post navigationउत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025: मतगणना शुरू, गांव-गांव में सियासी हलचल तेज गांव की सरकार का बदलता चेहरा: पंचायत चुनाव में जनमत ने सत्ता को झटका दिया, विपक्ष में लौटी उम्मीद की किरण
दैनिक प्रभातवाणी | 31 जुलाई 2025तकनीकी सुधार की दिशा में उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, डिजिटल फोरेंसिक लैब और जियोथर्मल नीति को मिली हरी झंडीउत्तराखंड सरकार ने राज्य के प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को आधुनिक और मज़बूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 9 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई। इनमें सबसे अहम है – डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना, उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025, सेतु भार वहन क्षमता जांच इकाई की स्थापना और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियमों में संशोधन। डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला: साइबर अपराधों की जांच में मददप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों और तकनीकी अपराधों की जाँच को तेज़ और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से डिजिटल फॉरेंसिक लैब की स्थापना का निर्णय लिया गया है। यह लैब विशेष रूप से डिजिटल साक्ष्यों की जांच, डेटा रिकवरी, मोबाइल और कंप्यूटर से सबूत इकट्ठा करने जैसे कार्यों में सक्षम होगी। इससे न सिर्फ़ पुलिस की जांच में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कोर्ट में पेश किए जाने वाले डिजिटल सबूतों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025: अक्षय ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदमराज्य सरकार ने उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा नीति 2025 को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर गर्म जलस्रोतों (Hot Springs) के माध्यम से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है। इससे पर्यावरण पर दबाव कम होगा और राज्य को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। नीति के तहत निजी और सार्वजनिक निवेशकों को प्रोत्साहन देने की योजना है।सेतु भार वहन क्षमता जांच इकाई: पुलों की सुरक्षा होगी सुनिश्चितराज्य के सभी पुलों की सुरक्षा जांच के लिए सेतु भार वहन क्षमता (Bridge Load Testing) इकाई की स्थापना की जाएगी। इसका कार्य पुलों की भार क्षमता, संरचना की मजबूती और उनके रखरखाव की आवश्यकता की वैज्ञानिक जांच करना होगा। यह इकाई सड़कों और पुलों की दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियमों में संशोधनराज्य सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए इसे और अधिक पारदर्शी व जनहितकारी बनाने का फैसला किया है। नए नियमों के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों में मिलने वाले राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और रोजगार के अवसरों के लिए किया जाएगा। यह निर्णय खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्रों के संतुलित विकास में सहायक सिद्ध होगा। राज्य के विकास को नई दिशासरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों से साफ़ संकेत मिलते हैं कि उत्तराखंड तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक क्षेत्र में लंबी दूरी की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। डिजिटल फोरेंसिक लैब और जियोथर्मल ऊर्जा नीति जैसे कदम 21वीं सदी के स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल की ओर संकेत करते हैं।दैनिक प्रभातवाणी :उत्तराखंड मंत्रिमंडल के ये निर्णय राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और प्रशासनिक रूप से पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के ज़रिए राज्य में विकास की रफ्तार और तेज़ होने की उम्मीद है। नवीनतम अपडेट के लिए जुड़े रहें: dainikprbhatvani.com