Spread the loveनैनीताल | 19 अप्रेल 2026 | दैनिक प्रभातवाणीउत्तराखंड के नैनीताल जिले से जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला हल्द्वानी क्षेत्र का है, जहां पांच सगे भाइयों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर बीजेपी विधायक के बेटे को सरकारी भूमि शामिल कर जमीन बेच दी। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।यह पूरा प्रकरण नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां जमीन की खरीद-फरोख्त में कथित तौर पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच भाइयों ने मिलकर जमीन के एक हिस्से में सरकारी संपत्ति और सिंचाई विभाग की संरचना को भी शामिल कर दिया और उसे निजी जमीन बताकर बेच दिया।इस मामले में पीड़ित पक्ष बंशीधर भगत के बेटे विकास भगत से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, विकास भगत ने वर्ष 2012 में ग्राम नंदपुर कठघरिया के पांच भाइयों—नवीन चंद्र, खीमानंद, मोहन चंद्र, कैलाश चंद्र और उमेश चंद्र—से लगभग 6691 वर्ग फुट जमीन खरीदी थी। उस समय यह सौदा सामान्य भूमि खरीद-फरोख्त की तरह किया गया था, लेकिन बाद में इसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब वर्ष 2019 में विकास भगत ने वही जमीन आगे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान जांच में सामने आया कि जिस जमीन का सौदा किया गया था, उसमें सरकारी भूमि और सिंचाई विभाग की गूल (नहर) का हिस्सा भी शामिल है। यह खुलासा होने के बाद पूरे मामले में हड़कंप मच गया।जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने सिंचाई विभाग की गूल को नुकसान पहुंचाकर उसे अपनी निजी भूमि में शामिल कर दिया और फिर उसी हिस्से को जमीन के साथ मिलाकर बेच दिया। यह मामला सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अवैध कब्जे से जुड़ा पाया गया।प्रशासन ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए वर्ष 2020 में विस्तृत जांच कराई। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हुई कि जमीन के सौदे में सरकारी भूमि का हिस्सा भी शामिल किया गया था। इसके बाद सिंचाई विभाग और प्रशासन ने विवादित भूमि को अपने कब्जे में ले लिया।हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी थी कि विक्रेता पक्ष विकास भगत को वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराएगा, लेकिन कई वर्षों तक यह वादा पूरा नहीं किया गया। इसी कारण मामला फिर से कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया।अब पुलिस ने जांच के आधार पर पांचों भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी भूमि के दुरुपयोग और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और सभी दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।सीओ सिटी अमित कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सिंचाई विभाग की गूल को तोड़कर उसे जमीन में मिलाया गया और फिर उसे बेचने की प्रक्रिया की गई। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और आगे की विवेचना जारी है।इस मामले ने स्थानीय स्तर पर जमीन कारोबार की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन को इस तरह निजी सौदों में शामिल किया जा सकता है, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न उठाता है।वहीं, राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर एक विधायक परिवार से जुड़ा हुआ है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से राजनीतिक प्रतिक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में जमीन विवाद और अनियमितताएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला इसलिए बड़ा बन गया क्योंकि इसमें सरकारी भूमि भी शामिल पाई गई है।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जमीन के इस सौदे में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक जमीन विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और भूमि कारोबार में पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे। Post Views: 3 Post navigationउत्तराखंड में 24 साल की युवती की संदिग्ध मौत, मौत से पहले दोस्त को भेजा मोबाइल पासवर्ड