Spread the loveदेहरादून, उत्तराखंड। उत्तराखंड में मानसून की जोरदार दस्तक के साथ ही चारधाम यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर गिरने से चमोली-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) कई स्थानों पर पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। हाईवे बंद होने से बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए हैं। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। चमोली और जोशीमठ के बीच स्थित गुलाबकोटी और पागलनाला क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ियों से टनों मलबा और बड़ी चट्टानें सड़क पर आ गिरी हैं। कुछ स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे मार्ग की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। गुलाबकोटी के पास कई हिस्सों में सड़क पर केवल बड़े-बड़े पत्थर और मलबा दिखाई दे रहा है तथा वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच स्थित संवेदनशील सिरोबगड़ डेंजर जोन में भी लगातार मलबा गिरने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से बद्रीनाथ हाईवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह क्षेत्र पहले भी भूस्खलन की घटनाओं के लिए संवेदनशील रहा है और बारिश के दौरान यहां विशेष सतर्कता बरती जाती है। हाईवे बंद होने से सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। सरकारी आंकड़ों और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, आठ हजार से अधिक श्रद्धालु और स्थानीय निवासी विभिन्न स्थानों पर फंस गए हैं। बड़ी संख्या में यात्री पीपलकोटी, जोशीमठ और चमोली में सुरक्षित स्थानों तथा अपने वाहनों में ही रुकने को मजबूर हैं। बद्रीनाथ मार्ग बाधित होने का सीधा असर हेमकुंड साहिब यात्रा पर भी पड़ा है और तीर्थयात्रियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी हुई हैं। जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की मदद से सड़क से मलबा और बोल्डर हटाने का कार्य लगातार जारी है। हालांकि लगातार बारिश और पहाड़ियों से पत्थर गिरने के कारण राहत कार्य में बाधाएं भी आ रही हैं। जिला प्रशासन ने फंसे हुए यात्रियों के लिए जोशीमठ, पीपलकोटी और अन्य सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी ठहराव और भोजन की व्यवस्था की है। कई स्थानों पर मुफ्त लंगर और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बीच, मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए चमोली और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने यात्रियों से कहा है कि वे फिलहाल जहां हैं वहीं सुरक्षित स्थान पर रुकें और मौसम सामान्य होने तक आगे बढ़ने का प्रयास न करें। साथ ही नदियों, बरसाती नालों और पहाड़ी झरनों से दूरी बनाए रखें, क्योंकि अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय आपदा प्रबंधन केंद्र, पुलिस हेल्पलाइन और जिला प्रशासन से सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेने की भी अपील की है। मौसम विभाग ने अगले कुछ समय तक राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते चारधाम यात्रा मार्ग पर सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी गई है। उत्तराखंड में मानसून की यह पहली बड़ी चुनौती चारधाम यात्रा और स्थानीय जनजीवन दोनों के लिए गंभीर परीक्षा बनकर सामने आई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और मौसम साफ होते ही मार्ग को शीघ्र सुचारू करने के प्रयास जारी हैं। Post Views: 3 Post navigation उत्तराखंड में मानसून का कहर: नैनीताल और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट, सात जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, अलकनंदा नदी का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता बंद था बद्रीनाथ हाईवे, 10 किलोमीटर पैदल चले स्वास्थ्यकर्मी; रास्ते में कराया सुरक्षित प्रसव, माँ और नवजात दोनों स्वस्थ