राज्य के कई हिस्सों में बारिश-बर्फबारी की चेतावनी, 23 जनवरी तक प्रभावी रहेगा ऑरेंज व येलो अलर्ट

उत्तराखंड में मौसम परिवर्तन के बीच 22 जनवरी 2026 को राज्यभर में प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियाँ जारी रहीं
राज्य के कई हिस्सों में बारिश-बर्फबारी की चेतावनी, 23 जनवरी तक प्रभावी रहेगा ऑरेंज व येलो अलर्ट
देहरादून/दैनिक प्रभातवाणी
गुरुवार, 22 जनवरी 2026
उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है, जो 23 जनवरी तक प्रभावी रहेगा। चेतावनी के अनुसार उच्च हिमालयी जिलों में भारी बर्फबारी की संभावना जताई गई है, जबकि मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के साथ तेज़ तूफ़ानी हवाएँ चल सकती हैं। बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
मौसम विभाग की विशेष चेतावनी के तहत चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और ऊधम सिंह नगर सहित कई जिलों को भारी मौसम प्रभाव वाले क्षेत्र में रखा गया है। इन जिलों में कहीं-कहीं तेज़ बारिश, ऊँचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और तेज़ हवाओं के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। खास तौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने, भूस्खलन और तापमान में अचानक गिरावट की संभावना को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की ओर से जिला स्तर पर बचाव और राहत तैयारियों को तेज कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में जेसीबी मशीनें, बर्फ हटाने वाले उपकरण और आपातकालीन टीमें तैनात की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि ठंड और मौसम जनित बीमारियों से निपटा जा सके। यात्रियों और पर्यटकों को ऊँचाई वाले क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
इसी बीच, हिमालयी क्षेत्र को लेकर एक और गंभीर चिंता सामने आई है। विदेशी रिपोर्टों के अनुसार, इस सर्दियों में उत्तराखंड के कई हिस्सों में अपेक्षाकृत भारी बर्फबारी नहीं होने से ग्लेशियरों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि असामान्य सूखा और बदलता जलवायु पैटर्न हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में जल सुरक्षा पर दीर्घकालिक खतरा पैदा हो सकता है।
जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ का समय पर और पर्याप्त मात्रा में जमना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यही बर्फ गर्मियों में नदियों और जल स्रोतों को जीवन देती है। यदि सर्दियों में बर्फबारी लगातार कमजोर होती रही, तो इसका सीधा असर कृषि, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन पर पड़ सकता है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम से जुड़ी ताज़ा जानकारी पर नज़र रखें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। वहीं, विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस नीतियाँ और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।