धराली (उत्तरकाशी) में बचाव और राहत कार्यों की रफ्तार तेज़, हेलीकॉप्टर मिशन और पुल निर्माण से लौट रही उम्मीदें

दैनिक प्रभातवाणी
धराली (उत्तरकाशी) में बचाव और राहत कार्यों की रफ्तार तेज़, हेलीकॉप्टर मिशन और पुल निर्माण से लौट रही उम्मीदें
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा ने न केवल स्थानीय जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के साथ-साथ सेना, वायुसेना और राहत एजेंसियों को भी आपातकालीन मोड में ला खड़ा किया है। भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भू-स्खलन ने कई गांवों को बाहरी दुनिया से काट दिया है। घर बह गए, पुल टूट गए, और सड़कें ध्वस्त हो गईं। इस आपदा से निपटने के लिए ज़मीनी और हवाई — दोनों स्तरों पर राहत व बचाव अभियान तेज़ी से चल रहे हैं।
हवाई मोर्चे पर सेना और वायुसेना का दमखम
धराली में सबसे बड़ी चुनौती है — दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक समय पर पहुँचना। इन क्षेत्रों में न तो सड़कें सही सलामत हैं और न ही ज़मीनी रास्तों से पहुंचना आसान है। ऐसे में भारतीय वायुसेना के MI-17, Chinook और ALH (Advanced Light Helicopter) जैसे हेलीकॉप्टर मिशन जीवन रेखा साबित हो रहे हैं।
MI-17 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल भारी मात्रा में राहत सामग्री — आटा, चावल, दाल, बोतलबंद पानी, दवाइयाँ और टेंट — पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। इनका पेलोड कैपेसिटी अधिक होने के कारण एक ही बार में हज़ारों किलो सामग्री दूरस्थ इलाकों में पहुंचाई जा रही है।
Chinook हेलीकॉप्टर, जो डबल रोटर और अत्यधिक लिफ्ट क्षमता के लिए जाने जाते हैं, का उपयोग बड़े और भारी उपकरण जैसे जेनरेटर, अस्थायी पुल के हिस्से, और वाहन पहुंचाने में किया जा रहा है।
ALH हेलीकॉप्टर मुख्य रूप से मेडिकल इवैक्यूएशन (MEDEVAC) और छोटे पैमाने पर राहत पहुंचाने में लगाए गए हैं। ये हेलीकॉप्टर अपेक्षाकृत छोटे लैंडिंग ज़ोन पर उतरने में सक्षम हैं, जिससे पहाड़ी और संकरे इलाकों में फंसे लोगों को जल्दी निकाला जा सके।
खराब मौसम बनी सबसे बड़ी अड़चन
उत्तरकाशी के पहाड़ी इलाके में राहत कार्य हमेशा मौसम के भरोसे रहते हैं। बीते दिनों तेज़ हवाओं, घने बादलों और लगातार बारिश ने हेलीकॉप्टर मिशनों को कई बार रोकना पड़ा। कम दृश्यता की वजह से उड़ान भरना और लैंडिंग करना बेहद जोखिमपूर्ण हो जाता है।
एक वायुसेना अधिकारी ने बताया —
“हमारे पायलट हर उड़ान से पहले मौसम का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं। बादलों के बीच उड़ान भरना, सीमित दृश्यता में उतरना और ऊंचाई पर वजन ले जाना — यह सब बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेकिन मिशन के महत्व को देखते हुए, हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”
BRO का जमीनी मोर्चा — Limchigad बेलिज ब्रिज का पुनर्निर्माण
धराली तक राहत सामग्री पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा टूटा हुआ Limchigad पुल था। इस पुल के बह जाने से इलाके का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया था। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस पुल के पुनर्निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
बेलिज ब्रिज का निर्माण तकनीकी रूप से तेज़ और प्रभावी समाधान है, जिसमें स्टील के प्रीफैब्रिकेटेड पैनल्स को मौके पर जोड़कर पुल तैयार किया जाता है। इससे भारी मशीनरी और वाहनों की आवाजाही फिर से संभव हो जाती है। BRO के इंजीनियर दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि अगले कुछ दिनों में पुल पूरी तरह तैयार हो सके।
BRO के एक वरिष्ठ इंजीनियर के अनुसार —
“यह पुल सिर्फ़ लोहे का ढांचा नहीं है, यह धराली और बाकी क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा है। इसके बनने से न सिर्फ राहत सामग्री तेज़ी से पहुंचेगी, बल्कि भविष्य में भी आपातकालीन हालात में मदद मिलेगी।”
स्थानीय लोगों की कठिनाइयाँ और उम्मीदें
आपदा के कारण धराली और आसपास के कई गांव — जैसे गंगोत्री मार्ग के कुछ हिस्से, बगोरी, हर्षिल और अन्य छोटे बस्तियां — बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगों के घर बह गए हैं, खेत बर्बाद हो गए हैं, और जीविका के साधन नष्ट हो गए हैं।
स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह ने बताया —
“शुरुआत में तो हमें लगा कि शायद मदद नहीं पहुंचेगी, लेकिन अब हेलीकॉप्टर से खाना, पानी और दवाइयाँ मिलने लगी हैं। BRO पुल बना रहा है, तो उम्मीद है कि सड़क भी जल्दी चालू हो जाएगी।”
महिलाओं और बच्चों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें खाने-पीने का इंतज़ाम, कंबल और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की तात्कालिक व्यवस्था
दूरस्थ इलाकों से गंभीर रूप से घायल और बीमार लोगों को ALH हेलीकॉप्टर से देहरादून और उत्तरकाशी के बड़े अस्पतालों में ले जाया जा रहा है। मेडिकल टीमों ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किए हैं, जहाँ डॉक्टर और नर्सें लगातार ड्यूटी पर हैं।
दवाइयों के साथ-साथ टीकाकरण और पानी की स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि आपदा के बाद फैलने वाली बीमारियों को रोका जा सके।
प्रशासन की रणनीति और समन्वय
उत्तराखंड प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया में एक बहु-स्तरीय समन्वय तंत्र तैयार किया है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) राहत सामग्री की आपूर्ति और वितरण पर नज़र रख रहा है।
NDMA और NDRF फंसे लोगों को निकालने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी उपलब्ध करा रहे हैं।
सेना और वायुसेना का फोकस लॉजिस्टिक्स और मेडिकल इवैक्यूएशन पर है।
BRO का लक्ष्य है कि सभी कटे हुए इलाकों को सड़क से फिर से जोड़ा जाए।
मौसम विभाग की चेतावनी और आगे की चुनौतियाँ
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक उत्तरकाशी और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए स्थानीय लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने को कहा है।
मौसम की यह अनिश्चितता रेस्क्यू मिशनों की सबसे बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम सुधारते ही बचाव कार्य की गति दोगुनी हो सकती है।
मानवीय एकजुटता की मिसाल
धराली त्रासदी के बाद राज्य भर से स्वयंसेवी संगठन, एनजीओ और आम नागरिक मदद के लिए आगे आए हैं। कई लोग अपने स्तर पर भोजन पैकेट, कपड़े और आर्थिक सहायता भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर #PrayForDharali और #UttarkashiRelief जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जिनके जरिए लोग राहत अभियानों के लिए फंड जुटा रहे हैं।
दैनिक प्रभातवाणी — उम्मीद का नया पुल
धराली और उत्तरकाशी के बाकी प्रभावित क्षेत्रों में चल रहा राहत और बचाव अभियान यह साबित करता है कि विपरीत परिस्थितियों में एकजुट होकर कार्य करने से ही कठिनाइयों पर विजय पाई जा सकती है। हेलीकॉप्टर मिशन, BRO का पुल निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जनता का सहयोग — ये सभी मिलकर एक नई उम्मीद का पुल बना रहे हैं।
भले ही खराब मौसम और भौगोलिक कठिनाइयाँ अभी भी बाधा बन रही हैं, लेकिन प्रयासों की रफ्तार और दिशा यह संकेत देती है कि धराली जल्द ही सामान्य जीवन की ओर लौटेगा।