उत्तराखंड मेट्रो प्रोजेक्ट: देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार को जोड़ने वाला 73 किमी लंबा सफर, 2026 तक संचालन की उम्मीद

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 6 दिसंबर 2025
उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग आवागमन करते हैं। चारधाम यात्रा, हरिद्वार-ऋषिकेश की धार्मिक आस्था, देहरादून का शिक्षा और व्यापारिक महत्व तथा मसूरी का पर्यटन आकर्षण मिलकर इस क्षेत्र को देशभर में अलग पहचान दिलाते हैं। लेकिन वर्षों से यह इलाका बढ़ते यातायात दबाव, प्रदूषण और अव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन से जूझ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने उत्तराखंड मेट्रो प्रोजेक्ट की परिकल्पना की है, जो आने वाले वर्षों में यहां के आवागमन के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।
73 किलोमीटर का भव्य सपना
उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UKMRC) की ओर से तैयार की गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में लगभग 73 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रस्तावित है। यह नेटवर्क मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला कॉरिडोर देहरादून शहर के भीतर यातायात दबाव को कम करने के लिए है, जबकि दूसरा कॉरिडोर हरिद्वार और ऋषिकेश को राजधानी देहरादून से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य न केवल स्थानीय लोगों की सुविधा बढ़ाना है, बल्कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी आधुनिक, सुरक्षित और तेज़ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
दो कॉरिडोर की योजना
पहले चरण में दो मुख्य लाइनें तैयार करने का प्रस्ताव है –
देहरादून इंट्रा-सिटी कॉरिडोर – यह लाइन शहर के भीतर राजपुर रोड, घंटाघर, आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ेगी।
हरिद्वार–ऋषिकेश–देहरादून कॉरिडोर – यह लंबा कॉरिडोर तीनों धार्मिक और पर्यटन महत्व के शहरों को जोड़ते हुए हजारों यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाएगा।
इन दोनों कॉरिडोर पर मिलाकर लगभग 22 प्रमुख स्टेशन बनाए जाने की संभावना जताई गई है। प्रत्येक स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का प्रस्ताव है।
मेट्रोलाइट और नियो मेट्रो तकनीक
इस प्रोजेक्ट को पारंपरिक भारी-भरकम मेट्रो के बजाय मेट्रोलाइट और नियो मेट्रो तकनीक से बनाया जाएगा। यह तकनीक लागत में किफायती है और छोटे शहरों या मध्यम घनत्व वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। नियो मेट्रो रबर टायर पर चलने वाली प्रणाली है, जो सड़क पर ही समर्पित लेन के भीतर चल सकती है। इससे निर्माण लागत घटेगी और समय की बचत होगी।
लागत और वित्तीय प्रबंधन
अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। राज्य सरकार ने केंद्र से सहयोग की मांग की है और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि वित्तीय बोझ कम हो और निर्माण सुगमता से हो सके।
2026 तक संचालन की उम्मीद
DPR के आधार पर उत्तराखंड सरकार और UKMRC का लक्ष्य है कि 2026 तक मेट्रो का पहला चरण शुरू कर दिया जाए। इसके लिए भूमि अधिग्रहण, डिजाइन स्वीकृति और फंडिंग की प्रक्रिया तेज की जा रही है। हालांकि, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की तरह यह तारीख कई प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करेगी।
पर्यावरण और सामाजिक लाभ
उत्तराखंड के लिए मेट्रो केवल परिवहन का साधन नहीं होगी, बल्कि यह राज्य के पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव घटेगा और प्रदूषण कम होगा।
हरिद्वार और ऋषिकेश आने वाले श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से राहत मिलेगी।
देहरादून जैसे शिक्षा और रोजगार केंद्र में छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को समय की बचत होगी।
पर्यटन उद्योग को आधुनिक परिवहन मिलने से और बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हालांकि यह प्रोजेक्ट आकर्षक दिखता है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं।
वित्तीय संकट: इतनी बड़ी लागत जुटाना राज्य सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
भौगोलिक परिस्थितियाँ: हिमालयी राज्य होने के कारण निर्माण कार्य में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
पर्यावरणीय स्वीकृति: गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में निर्माण के लिए सख्त पर्यावरणीय मानदंडों का पालन करना होगा।
समय सीमा: यदि प्रशासनिक और तकनीकी रुकावटें आईं, तो 2026 तक संचालन शुरू करना कठिन हो सकता है।
लोगों की उम्मीदें
स्थानीय लोगों और यात्रियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साह है। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश तीनों ही शहर धार्मिक, शैक्षिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद अहम हैं। यहां रोजाना लाखों लोग यात्रा करते हैं। यदि यह मेट्रो समय पर शुरू होती है तो यह उत्तराखंड के इतिहास में सबसे बड़ा बुनियादी ढांचा सुधार होगा।
भविष्य की रूपरेखा
सरकार की योजना है कि भविष्य में इस मेट्रो नेटवर्क को मसूरी, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और नैनीताल जैसे इलाकों तक भी बढ़ाया जा सके। यदि ऐसा होता है, तो उत्तराखंड का परिवहन ढांचा राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बन सकता है।