Gazette Error: Jaunsari Tribals को “Jansari” नाम की वजह से Scheme Benefits से Disqualified?
ajaysemalty98 September 20, 2025
दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 20 सितंबर 2025
Gazette Error: Jaunsari Tribals को “Jansari” नाम की वजह से Scheme Benefits से Disqualified?
देहरादून: उत्तराखंड की जौनसार-भाबर (Jaunsar Bhabar) जनजाति के लोगों के लिए एक अजीबोगरीब लेकिन गहरी समस्या सामने आई है—सरकारी गज़ट में ‘Jaunsari’ शब्द के बजाय गलती से ‘Jansari’ लिखा गया है। इस नाम-गलती की वजह से केंद्र सरकार की कई कल्याण योजनाएँ, नौकरियों की नियुक्तियाँ और अन्य लाभ इस जनजाति समुदाय तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।
उच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को इस गलती को सुधारने और छह हफ्तों में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला अब पूरे राज्य में बहस का विषय बन गया है क्योंकि नाम की एक मामूली त्रुटि ने हजारों लोगों के भविष्य को प्रभावित कर दिया है।
पृष्ठभूमि और याचिका की कहानी
यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से सामने आया। याचिकाकर्ता ने बताया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत जारी गज़ट नोटिफिकेशन में “Jaunsari” की जगह “Jansari” लिखा गया। यह त्रुटि वर्षों से सरकारी रिकॉर्ड में बनी हुई है। नतीजतन, जब केंद्र सरकार की जनजातीय योजनाओं, छात्रवृत्ति, आरक्षण और अन्य लाभों के लिए आवेदन किए जाते हैं तो विभागों को गज़ट में दर्ज नाम से मिलान करना पड़ता है। चूंकि गज़ट में नाम गलत है, आवेदन स्वीकृत नहीं हो पाते।
प्रभाव: योजनाओं और नौकरियों में रुकावट
योजनाओं में बाधा:
गलत नाम के कारण केंद्र और राज्य की कई योजनाओं के लाभ सीधे प्रभावित हो रहे हैं। पात्र लोग पहचान के लिए सही प्रमाण पत्र दिखाने के बावजूद कई बार लाभ से वंचित रह जाते हैं।
रोज़गार पर असर:
सरकारी नौकरियों में जाति या जनजाति प्रमाण पत्र आवश्यक होता है। जब प्रमाण पत्र में “Jaunsari” और सरकारी गज़ट में “Jansari” दर्ज है तो दस्तावेज़ों का मिलान नहीं हो पाता। इसके कारण भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, आवेदन निरस्त होना और उम्मीदवारों के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ रही है।
मानसिक और सामाजिक दबाव:
कई युवा और परिवार वर्षों से सरकारी योजनाओं और नौकरियों का लाभ लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बार-बार स्पष्टीकरण और अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया ने लोगों को मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयों में डाल दिया है।
न्यायालय का हस्तक्षेप
उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि छह हफ्तों के भीतर इस त्रुटि को सुधार कर सही नाम जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सुधार प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरिम व्यवस्था बनाई जाए ताकि लाभार्थी योजनाओं से वंचित न हों। यह आदेश समुदाय के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है, क्योंकि अब तक राज्य और केंद्र के बीच फाइलों का आदान-प्रदान ही होता रहा था।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत जारी गज़ट नोटिफिकेशन राष्ट्रपति की स्वीकृति से लागू होता है। इसमें किसी भी तरह का संशोधन करना एक औपचारिक और समय लेने वाली प्रक्रिया है। नाम सुधारने के लिए केंद्र सरकार को नई अधिसूचना जारी करनी होगी। जब तक यह नहीं होता, तब तक संबंधित विभागों को विशेष आदेश जारी करने होंगे ताकि “Jaunsari” प्रमाण पत्र वाले लोग योजनाओं का लाभ ले सकें।
समाधान की संभावनाएँ
गज़ट नोटिफिकेशन का त्वरित संशोधन: केंद्र सरकार को जल्द से जल्द एक नया नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए, जिसमें “Jaunsari” नाम को आधिकारिक रूप से सही किया जाए।
अंतरिम आदेश: जब तक गज़ट में सुधार नहीं हो जाता, मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया जाए कि वे “Jaunsari” नाम के प्रमाण पत्रों को मान्य मानें।
स्थानीय स्तर पर जागरूकता: जिला प्रशासन और जनजातीय मामलों के विभाग को लोगों को यह समझाना होगा कि वे अपने प्रमाण पत्र सुरक्षित रखें और आवश्यकता पड़ने पर अदालत के आदेश का हवाला दें।
तकनीकी अपडेट: सभी सरकारी पोर्टलों और डाटाबेस में नाम संशोधन होने तक सॉफ़्टवेयर स्तर पर “Jaunsari” और “Jansari” दोनों नामों को मिलान के लिए स्वीकार किया जाए।
समुदाय की प्रतिक्रिया
जौनसार-भाबर के लोग लंबे समय से इस गलती को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। स्थानीय संगठनों और युवा मंचों ने कई बार राज्य सरकार और जनजातीय आयोग को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि यह सिर्फ नाम की गलती नहीं, बल्कि पहचान और अधिकारों का प्रश्न है। कई युवा बताते हैं कि उन्होंने छात्रवृत्ति और आरक्षण के लिए आवेदन किया, लेकिन गज़ट के रिकॉर्ड के कारण उनका आवेदन रद्द कर दिया गया।
दैनिक प्रभातवाणी
“Jaunsari” नाम की यह टंकण त्रुटि दिखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हैं। एक शब्द की गलती ने हजारों लोगों को योजनाओं, नौकरियों और शिक्षा से मिलने वाले अवसरों से वंचित कर दिया है। उच्च न्यायालय का आदेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब केंद्र सरकार समयसीमा के भीतर गज़ट संशोधन को पूरा करेगी और विभागों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करेगी।
यह घटना सरकारी दस्तावेजों में सटीकता की अहमियत को रेखांकित करती है। एक साधारण स्पेलिंग एरर कैसे पूरे समुदाय के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है, जौनसार-भाबर का मामला इसका जीवंत उदाहरण है।