CBSE 2026-27: कक्षा 6 से 9 के सिलेबस में बड़ा बदलाव, तीन-भाषा फॉर्मूला और स्टैंडर्ड-एडवांस्ड स्तर लागू
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नई दिल्ली – 4 अप्रैल 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 के दिशानिर्देशों के अनुरूप, बोर्ड सत्र 2026-27 से नया पाठ्यक्रम लागू कर रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कक्षा 6 और कक्षा 9 के छात्रों पर पड़ेगा।

तीन-भाषा फॉर्मूला

सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। इसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी शिक्षा प्रदान करना और उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

बोर्ड परीक्षाओं पर प्रभाव

यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। कक्षा 6 से शुरू होने वाला यह बदलाव 2031 की बोर्ड परीक्षाओं में पूरी तरह दिखाई देगा, जब छात्रों को तीनों भाषाओं में परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

गणित और विज्ञान में दो स्तर

कक्षा 9 के छात्रों को गणित और विज्ञान में अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा। इसके लिए दो स्तर होंगे:

  • स्टैंडर्ड: 80 अंकों का सामान्य पेपर, सभी छात्रों के लिए अनिवार्य।
  • एडवांस्ड: 25 अंकों का अतिरिक्त पेपर, केवल उन छात्रों के लिए जो विषय में गहरी समझ चाहते हैं।

एडवांस्ड पेपर के अंक मुख्य प्रतिशत में नहीं जोड़े जाएंगे, लेकिन 50% या उससे अधिक अंक लाने पर यह उपलब्धि मार्कशीट पर अलग दर्शाई जाएगी, जिससे भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए लाभ होगा।

कंप्यूटर और AI का अनिवार्य पाठ्यक्रम

कक्षा 9 और 10 में ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)’ को अनिवार्य विषय बनाया गया है। कक्षा 10 के छात्रों को 2029 से इन विषयों के लिए बोर्ड परीक्षा देना होगी।

कौशल विकास और कला शिक्षा

कक्षा 9 और 10 में अब आर्ट एजुकेशन, फिजिकल एजुकेशन और वोकेशनल एजुकेशन (व्यावसायिक शिक्षा) को अनिवार्य किया गया है। सत्र 2027-28 से वोकेशनल एजुकेशन में बोर्ड परीक्षा भी आयोजित की जाएगी।

विदेशी छात्रों के लिए राहत

विदेशी स्कूलों से लौटने वाले छात्रों के लिए भाषा नियमों में लचीलापन रहेगा। यदि उनके पिछले स्कूल में तीसरी भाषा उपलब्ध नहीं थी, तो उन्हें विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है।

CBSE का यह कदम केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास और विशेषज्ञता हासिल करने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। दो स्तर के विषय और बहुभाषी शिक्षा से छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम होगा और उनकी रुचियों के अनुसार शिक्षा संभव होगी।