Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 6 अप्रेल 2026|देहरादून। राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 14 अप्रैल को आम जनता के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन करेंगे। इस हाईवे के खुलने के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच सफर महज 2.5 से 3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे पहले यह दूरी 5–6 घंटे का समय लेती थी। उद्घाटन से पहले एक्सप्रेसवे के नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र शेखर आजाद ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि इस एक्सप्रेसवे का नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा जाए। सांसद ने अपने पत्र में लिखा है कि यह प्रोजेक्ट न केवल विकास का प्रतीक बने, बल्कि संविधान निर्माता और समाज सुधारक बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान के प्रति श्रद्धांजलि भी हो। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश के करोड़ों लोगों, विशेषकर बहुजन समाज के लिए गर्व और सम्मान का विषय होगा।सांसद ने सोशल मीडिया पर भी इस पत्र को साझा करते हुए लिखा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण 2023–24 तक पूरा होने वाला था, लेकिन करीब दो साल की देरी के बाद अब यह परियोजना पूरी हो रही है। उन्होंने इसे आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण कदम बताया और सभी नागरिकों से अपील की कि इस नामकरण पर विचार किया जाए।दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक अहम ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट है, जिसे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के नाम से भी जाना जाता है। यह करीब 213 किमी लंबा छह लेन का हाईवे है, जिसकी लागत लगभग 12 हजार करोड़ रुपए है। हाईवे का मार्ग दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर गाजियाबाद, बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है।इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत है राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर 12 किमी लंबा एशिया का सबसे लंबा ‘वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर’, जिससे वन्यजीवों के विचरण में कोई व्यवधान नहीं आएगा। इसके जरिए गाड़ियों की तेज गति और वन्यजीवों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की गई हैं। इस तकनीकी नवाचार से यह हाईवे न केवल यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण और संरक्षण के दृष्टिकोण से भी मिसाल बन गया है।एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद न केवल उत्तराखंड और दिल्ली के बीच आवागमन आसान होगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलेगी। देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच में समय की बचत होगी। वहीं, राजधानी दिल्ली से उत्तराखंड के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों तक माल-वाहन और लोगों का आवागमन भी तेज और सुरक्षित होगा।अधिकारियों का कहना है कि लोकार्पण के बाद इस हाईवे पर ट्रैफिक नियंत्रण, सुरक्षा और निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे मार्ग में चारधाम यात्रा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।इस एक्सप्रेसवे का नामकरण और उद्घाटन निश्चित रूप से उत्तराखंड और दिल्ली के नागरिकों के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। वहीं, सांसद चंद्र शेखर आजाद के सुझाव के बाद यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि इसे बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर रखा जाना चाहिए। Post Views: 3 Post navigationउत्तराखंड स्वास्थ्य अलर्ट: 4,216 गांवों में ट्यूबरक्लोसिस का खतरा, सरकार ने अभियान शुरू किया उत्तराखंड में चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल: कांग्रेस में दलबदल की दूसरी खेप तैयार