Spread the loveनैनीताल (उत्तराखंड), 23 अप्रैल 2026 | दैनिक प्रभातवाणीनैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल कचरे के खुले में निस्तारण के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इस पूरे प्रकरण पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करे। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और संबंधित विभागों से जवाब-तलब शुरू हो गया है।मामला उस समय सामने आया जब एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत को अवगत कराया गया कि पिथौरागढ़ में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट निर्धारित मानकों के अनुसार निस्तारित नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि यह खतरनाक कचरा नदियों, नालों और खुले स्थानों पर फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है।याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मेडिकल कचरे में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, सुइयां, दवाइयों के अवशेष और अन्य संक्रमित सामग्री शामिल होती है, जो संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण बन सकती है। ऐसे में यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं किया गया, तो यह भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों से स्पष्ट जवाब मांगा है कि अब तक मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। अदालत ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।इस पूरे मामले ने एक बार फिर पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण प्रबंधन की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि इस तरह की लापरवाही पर रोक लगाई जा सके।दैनिक प्रभातवाणी इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। Post Views: 3 Post navigationटिहरी हादसा बना काल: गहरी खाई में गिरा वाहन, 8 लोगों की मौत से मचा हड़कंप