Spread the love चमोली। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र से एक बार फिर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के पास स्थित कंचनगंगा के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में आज अचानक एक विशाल ग्लेशियर टूटकर नीचे आ गिरा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तेज गर्जना जैसी आवाज गूंज उठी और कुछ ही पलों में बर्फ का विशाल गुबार पहाड़ियों के बीच फैल गया। इस खौफनाक एवलांच का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरानी और चिंता जता रहे हैं। https://dainikprbhatvani.com/wp-content/uploads/2026/05/Screen-Recording-2026-05-24-215024.mp4 जानकारी के अनुसार यह घटना बदरीनाथ धाम से लगभग चार किलोमीटर दूर ऊंचाई वाले इलाके में हुई। स्थानीय लोगों और यात्रियों ने बताया कि अचानक पहाड़ों की तरफ से जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसके बाद लोगों की नजरें ऊंची चोटियों की ओर चली गईं। वहां भारी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर का हिस्सा तेजी से नीचे गिरता दिखाई दिया। कुछ देर तक पूरे क्षेत्र में धुंध और बर्फ का गुबार छाया रहा। हालांकि राहत की बात यह रही कि जिस स्थान पर एवलांच हुआ वह मुख्य यात्रा मार्ग से दूर था। इस वजह से चारधाम यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों या किसी वाहन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। इसके बावजूद घटना ने प्रशासन और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु इन हिमालयी मार्गों से होकर गुजरते हैं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटता है और तेज रफ्तार से नीचे की ओर बढ़ता चला जाता है। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका सफेद धूल और बर्फ के बादलों से भर जाता है। वीडियो देखने वाले कई लोगों ने इसे बेहद भयावह बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाएं अब पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रही हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ता वैश्विक तापमान, जलवायु परिवर्तन और बर्फबारी के बदलते पैटर्न हिमालय के ग्लेशियरों को कमजोर बना रहे हैं। गर्मियों के मौसम में तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण ग्लेशियरों में दरारें तेजी से विकसित होती हैं, जिससे एवलांच और ग्लेशियर टूटने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं। यहां छोटी सी प्राकृतिक अस्थिरता भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने कई बड़ी आपदाएं देखी हैं, जिनमें ग्लेशियर टूटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं शामिल रही हैं। विशेषज्ञ इसे केवल प्राकृतिक घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं। चारधाम यात्रा के दृष्टिकोण से भी यह घटना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर पहुंचते हैं। ऐसे में हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती अस्थिरता प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है। ड्रोन और मौसम संबंधी उपकरणों की मदद से पहाड़ी क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मई और जून के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे बर्फ पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यदि इसी दौरान भारी बर्फ जमा हो या अचानक मौसम में बदलाव आए तो ग्लेशियर कमजोर होकर टूट सकते हैं। यही कारण है कि हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा और पर्वतारोहण के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। स्थानीय लोगों ने भी चिंता जताई है कि पहले इस तरह की घटनाएं कम देखने को मिलती थीं, लेकिन अब लगभग हर वर्ष कहीं न कहीं ग्लेशियर टूटने या एवलांच की खबरें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि बदलता मौसम और लगातार बढ़ती मानवीय गतिविधियां हिमालयी संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही यात्रियों को मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करने और संवेदनशील इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दैनिक प्रभातवाणी की अपील है कि हिमालय केवल पर्यटन और आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील प्राकृतिक धरोहर भी है। बदलते मौसम और ग्लेशियरों की बढ़ती अस्थिरता को गंभीरता से लेना अब समय की आवश्यकता बन चुका है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: देहरादून को मिला नया डीएम, कई जिलों और विभागों में बदले गए अधिकारी गंगा दशहरा पर गंगोत्री धाम में उमड़ी श्रद्धा, पवित्र स्नान के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालु