उत्तराखंड OPS आंदोलन: चितई गोल्ज्यू मंदिर में पेंशन न्याय यात्रा
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अल्मोड़ा, दैनिक प्रभातवाणी।

उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली मोर्चा (NOPRUF) और संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के बैनर तले निकाली गई “पेंशन न्याय यात्रा” राज्य के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए अल्मोड़ा पहुंची, जहां यह यात्रा प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चितई गोल्ज्यू देवता मंदिर में संपन्न हुई। इस यात्रा का उद्देश्य कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों की उस मांग को सामने रखना था, जिसमें वे पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली और अपने सुरक्षित भविष्य की गारंटी की मांग कर रहे हैं।

यह यात्रा केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि एक भावनात्मक और सामाजिक पहल के रूप में देखी जा रही है। अलग-अलग विभागों से आए हजारों कर्मचारियों ने इस यात्रा में भाग लिया और अल्मोड़ा स्थित चितई गोल्ज्यू देवता मंदिर पहुंचकर न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज के समक्ष अपनी पीड़ा और मांगों को रखा। मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से एक लिखित मांग पत्र (अर्जी) भी अर्पित किया, जिसमें पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने की अपील की गई।

उत्तराखंड OPS आंदोलन: चितई गोल्ज्यू मंदिर में पेंशन न्याय यात्रा

कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना (NPS) उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती क्योंकि यह पूरी तरह बाजार आधारित प्रणाली पर निर्भर है। इस व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती, जिससे कर्मचारियों को अपने बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा का डर बना रहता है। वहीं पुरानी पेंशन योजना को वे एक स्थायी और भरोसेमंद सामाजिक सुरक्षा का साधन मानते हैं, जिसमें सेवा निवृत्ति के बाद नियमित आय सुनिश्चित रहती है।

इस आंदोलन में केवल अल्मोड़ा ही नहीं बल्कि पूरे कुमाऊं और गढ़वाल मंडल से आए शिक्षक संगठनों, राजस्व विभाग के कर्मचारियों, तकनीकी स्टाफ और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए। बड़ी संख्या में एकजुट हुए इन कर्मचारियों ने सरकार से साफ शब्दों में मांग की कि वर्ष 2005 के बाद नियुक्त सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा का सवाल है।

आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार जल्द इस विषय पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत देहरादून में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन, जिलों में जनजागरण अभियान और ब्लॉक स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन अब धीरे-धीरे राज्यव्यापी जनआंदोलन का रूप ले रहा है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन अब यह मुद्दा निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। उनका यह भी कहना है कि न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज के दरबार में की गई यह अर्जी केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश है कि कर्मचारियों की आवाज अब हर स्तर तक पहुंचनी चाहिए।

कुल मिलाकर, अल्मोड़ा के चितई गोल्ज्यू मंदिर में पहुंची यह पेंशन न्याय यात्रा उत्तराखंड में OPS बहाली की मांग को और अधिक मजबूती प्रदान करती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव और कर्मचारियों की भावनाओं को किस तरह संबोधित करती है और क्या पुरानी पेंशन योजना की बहाली की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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