Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | उत्तराखंड विशेष रिपोर्ट उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नई योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए प्रयास कर रही है। सरकार का दावा है कि राज्य में बेरोजगारी को कम करने और स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और होमस्टे जैसी योजनाओं को प्रमुख आधार बनाया गया है, जिनके जरिए हजारों युवाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने हाल ही में बयान दिया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार केवल सरकारी नौकरियों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि स्वरोजगार को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर आगे बढ़ रही है। यह मॉडल राज्य के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रहा है, जहां पारंपरिक रोजगार सीमित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पशुपालन विभाग के माध्यम से अब तक लगभग 27,000 युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है। इसमें डेयरी फार्मिंग, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्मिंग और अन्य पशुपालन आधारित व्यवसाय शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों से न केवल युवाओं की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर शुरू किए गए पशुपालन व्यवसाय अब धीरे-धीरे बड़े उद्यमों में बदलते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा राज्य में होमस्टे योजना को भी पर्यटन आधारित रोजगार का मजबूत माध्यम माना जा रहा है। उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य में होमस्टे मॉडल ने ग्रामीण परिवारों को सीधे पर्यटन से जोड़ने का काम किया है। कई युवाओं ने अपने घरों को होमस्टे में बदलकर पर्यटकों के लिए आवास और स्थानीय अनुभव की सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा मिला है। मत्स्य पालन और बागवानी क्षेत्र में भी सरकार द्वारा विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नदी घाटियों और पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं बागवानी के तहत सेब, कीवी, और अन्य फल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में सब्सिडी, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि स्वरोजगार केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का फोकस इसी मॉडल पर है कि राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर मिलें, ताकि पलायन की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब युवाओं को लंबे समय तक स्थायी आय और बाजार तक सीधी पहुंच मिल सके। कई बार शुरुआती सहायता के बाद विपणन और प्रबंधन की समस्याएं सामने आती हैं, जिनके समाधान के लिए सरकार को और मजबूत नीति की आवश्यकता होगी। इसके बावजूद राज्य में स्वरोजगार को लेकर सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में युवा अब पारंपरिक नौकरी की बजाय उद्यमिता की ओर रुख कर रहे हैं। बैंकिंग सहायता, सरकारी अनुदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने इस बदलाव को और तेज किया है। उत्तराखंड में चल रही इन योजनाओं को अगर सही दिशा और सतत समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में यह राज्य स्वरोजगार आधारित विकास मॉडल के रूप में देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में इन योजनाओं का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इसका लाभ मिल सके और राज्य में रोजगार का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा सके। Post Views: 2 Post navigation जॉब अलर्ट