Spread the loveचमोली, उत्तराखंड। पहाड़ की जिंदगी कठिन जरूर है, लेकिन यहां इंसानियत और सेवा की मिसालें भी उतनी ही ऊंची हैं। चमोली जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऐसा कार्य कर दिखाया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। सड़कें बंद थीं, संचार बाधित था और हर ओर मलबा पसरा हुआ था, लेकिन एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की जिंदगी बचाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगभग 10 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता पैदल तय किया। जानकारी के अनुसार, लगातार बारिश और लैंडस्लाइड के कारण क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो गई थीं। ऐसे में एक दूरस्थ गांव से गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने की सूचना स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची। महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी और उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। सड़क बंद होने के कारण एम्बुलेंस या अन्य वाहन मौके तक नहीं पहुंच सकते थे। सूचना मिलते ही डॉक्टरों और एएनएम की टीम बिना समय गंवाए आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण लेकर पैदल ही निकल पड़ी। रास्ता बेहद कठिन था। जगह-जगह मलबा, फिसलन और भूस्खलन का खतरा बना हुआ था, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों के कदम नहीं रुके। करीब 10 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई और पैदल सफर तय कर टीम गर्भवती महिला तक पहुंची। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने समझ लिया कि उसे अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय लग सकता है और थोड़ी सी देरी माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य टीम ने मौके पर ही सूझबूझ और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराने का निर्णय लिया। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टीम ने सफलतापूर्वक प्रसव कराया। सबसे राहत की बात यह रही कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों से जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्राथमिक उपचार देने के बाद दोनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जहां उनकी चिकित्सकीय निगरानी जारी है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम की सराहना हो रही है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानसून का मौसम हर वर्ष नई चुनौतियां लेकर आता है। सड़कें बंद होना, गांवों का संपर्क टूटना और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल होना आम बात है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर अक्सर स्थानीय लोगों के लिए देवदूत बनकर सामने आते हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर दूर-दराज के गांवों तक पहुंचते हैं और जरूरतमंदों को जीवनदान देने का काम करते हैं। चमोली की यह घटना केवल एक सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं है, बल्कि यह सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल है, जो यह बताती है कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की असली ताकत आधुनिक संसाधनों से कहीं अधिक उन लोगों के साहस और समर्पण में बसती है, जो हर परिस्थिति में मानव जीवन को बचाने के लिए तत्पर रहते हैं। स्वास्थ्य टीम का यह जज्बा पूरे समाज के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है। Post Views: 3 Post navigation भारी बारिश से चारधाम यात्रा प्रभावित: बद्रीनाथ हाईवे कई स्थानों पर बंद, 8 हजार से अधिक श्रद्धालु फंसे हाईकोर्ट सख्त: डॉक्टरों के तबादलों पर उत्तराखंड सरकार से एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट