Spread the loveChatGPT said:AIIMS ऋषिकेश में डॉक्टरों की हड़ताल से इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित: वेतन और प्रशासनिक व्यवहार पर गंभीर सवालदैनिक प्रभातवाणी | ऋषिकेश, 23 जुलाई 2025उत्तराखंड स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश की इमरजेंसी सेवाएं इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही हैं। कारण है – रेजिडेंट डॉक्टरों की 36 घंटे की सांकेतिक हड़ताल, जो 23 जुलाई की सुबह से शुरू हुई है। इस हड़ताल ने न केवल मरीजों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों के साथ व्यवहार, वेतन और कार्य वातावरण को लेकर चल रहे संघर्षों को एक बार फिर सामने ला दिया है।हड़ताल की शुरुआत और पृष्ठभूमिAIIMS ऋषिकेश के रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए 36 घंटे की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया। हड़ताल की शुरुआत मंगलवार सुबह 8:00 बजे हुई और इसका सीधा असर अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं पर देखा गया। डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं में अपनी उपस्थिति केवल 50% तक सीमित कर दी, जिससे कई गंभीर मरीजों के इलाज में विलंब हुआ।डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं। नियमित भुगतान न होने, समय पर वेतन न मिलने और पीएफ जैसी सुविधाओं में लापरवाही की बात को लेकर वे नाराज़ हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर दुर्व्यवहार और सम्मानजनक व्यवहार के अभाव की शिकायतें भी सामने आई हैं।डॉक्टरों के मुख्य आरोप: सिर्फ वेतन नहीं, सम्मान भी चाहिएAIIMS ऋषिकेश के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (RDA) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह केवल वेतन की बात नहीं है, बल्कि संस्थान में काम कर रहे डॉक्टर्स के आत्म-सम्मान और कार्य-संस्कृति की भी बात है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार वादे किए गए लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया गया।रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि –समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे वित्तीय तनाव पैदा हो गया है।पीएफ और अन्य स्टाफ सुविधाएं लगातार अनदेखी की जा रही हैं।प्रशासनिक अधिकारी डॉक्टरों से अभद्र व्यवहार करते हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं।लंबे समय से जारी मांगों को सुनने की बजाय दबाने की कोशिश की जाती है।इमरजेंसी सेवाओं पर प्रभावहड़ताल के कारण अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं पर सीधा असर पड़ा है। आमतौर पर जहां AIIMS की इमरजेंसी यूनिट 24×7 पूर्ण रूप से क्रियाशील रहती है, वहीं अब वहां केवल 50% स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। इससे गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार में देरी हो रही है। कई मरीजों को अन्य निजी अस्पतालों या नजदीकी सरकारी संस्थानों में रेफर किया गया।मरीजों की बढ़ती चिंताAIIMS ऋषिकेश में रोजाना हजारों मरीज उत्तराखंड और आसपास के राज्यों से इलाज के लिए आते हैं। इमरजेंसी सेवाओं पर निर्भर कई मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कई लोग परेशान होकर सरकारी हेल्पलाइन पर शिकायतें भी कर रहे हैं। एक मरीज के परिजन ने बताया, “हम दो दिन पहले यहां भर्ती हुए थे। डॉक्टर नियमित विजिट नहीं कर रहे हैं। आज कहा गया कि हड़ताल है, स्टाफ कम है। हमें समझ नहीं आ रहा कि इलाज कैसे होगा।”प्रशासन की प्रतिक्रियाAIIMS ऋषिकेश प्रशासन ने स्थिति को “अस्थायी असहमति” बताते हुए डॉक्टरों को वापस कार्य पर लौटने की अपील की है। संस्थान की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि डॉक्टरों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा। लेकिन इस आश्वासन पर रेजिडेंट डॉक्टरों का भरोसा अब डगमगा चुका है।डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि यदि प्रशासन उनके साथ खुली वार्ता नहीं करता और उनकी मांगों पर ठोस कार्य नहीं होता, तो भविष्य में पूर्ण कार्य बहिष्कार पर भी विचार किया जा सकता है।समर्थन में अन्य संस्थानों की प्रतिक्रियाएंAIIMS ऋषिकेश के डॉक्टरों को देशभर के कई मेडिकल संस्थानों के डॉक्टरों और संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। दिल्ली, भोपाल, जोधपुर, भुवनेश्वर जैसे शहरों के AIIMS से जुड़ी रेजिडेंट डॉक्टर यूनियनों ने एकजुटता प्रकट की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी इस हड़ताल को “न्यायोचित” करार देते हुए कहा है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ गरिमा और पारदर्शिता से व्यवहार किया जाना चाहिए।IMA के राष्ट्रीय सचिव ने कहा, “यदि डॉक्टर, जो दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे हैं, उन्हें सम्मान और समय पर वेतन न मिले, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”स्वास्थ्य व्यवस्था पर व्यापक असरइस हड़ताल से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में स्वास्थ्यकर्मियों के अधिकारों और सुविधा की प्राथमिकता कितनी है। AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में यदि रेजिडेंट डॉक्टरों को बार-बार हड़ताल करनी पड़ रही है, तो यह देश की स्वास्थ्य नीतियों की विफलता को दर्शाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डॉक्टरों की मांगें समय पर नहीं मानी गईं, तो यह केवल एक संस्थान की बात नहीं रहेगी। देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में असंतोष फैल सकता है, जिसका असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।सरकार की भूमिका और उम्मीदफिलहाल राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने कहा है कि AIIMS प्रशासन को कहा गया है कि वह डॉक्टरों की मांगों पर प्राथमिकता से विचार करे। लेकिन यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो यह मसला संसद स्तर तक भी उठ सकता है।हड़ताल से प्रभावित मरीजों को तात्कालिक राहत देने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के जिला अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है।दैनिक प्रभातवाणीAIIMS ऋषिकेश की यह हड़ताल केवल एक संस्थान का मुद्दा नहीं है। यह उस पूरी व्यवस्था की गूंज है, जहां स्वास्थ्यकर्मी सम्मान, वेतन और गरिमा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन और सरकार को इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि आज इसका समाधान नहीं हुआ, तो कल यह लहर देशभर के संस्थानों में असंतोष का रूप ले सकती है।डॉक्टरों की यह हड़ताल न केवल एक चेतावनी है, बल्कि यह एक मौका भी है – स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने और उसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने का। Post Views: 79 Post navigation9 महीने बाद भी UPNL कर्मचारियों का भविष्य अधर में: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी, हड़ताल और अवमानना याचिका की तैयारी ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट में सामने आया 200 करोड़ का घोटाला: चमोली और रुद्रप्रयाग सेक्शन की सीबीआई जांच शुरू