January 15, 2026

GDP ग्रोथ में भारत अव्वल, लेकिन रोजगार और निजी निवेश बना चिंता का विषय

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भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मजबूती के संकेत दे रही है। रॉयटर्स के हालिया सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025–26 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस अनुमान ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित रखा है।

इस विकास के पीछे सरकार की नीतिगत स्थिरता, बुनियादी ढांचे में बढ़ता निवेश, सेवा क्षेत्र का लगातार विस्तार और वैश्विक निवेशकों का भारत पर विश्वास मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की आर्थिक वृद्धि संतुलित बनी हुई है और बाहरी वैश्विक दबावों के बावजूद भारत अपनी रफ्तार बनाए रखने में सफल हो रहा है।

हालांकि इस मजबूत वृद्धि के बावजूद निजी निवेश और रोजगार सृजन की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। सर्वे में यह सामने आया कि उद्योगों में पूंजी निवेश अभी भी महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंचा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नौकरियों की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारत को अपने विकास के इस रुझान को बनाए रखना है, तो उसे निजी क्षेत्र को और अधिक प्रोत्साहन देना होगा। साथ ही रोजगार सृजन को प्राथमिकता बनाते हुए शिक्षा, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने होंगे।

इस सर्वे ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत न केवल वर्तमान में, बल्कि आने वाले वर्षों में भी वैश्विक अर्थव्यवस्था का मजबूत ग्रोथ इंजन बना रहेगा।