January 11, 2026

Old Pension Scheme (OPS) की बहाली: PCS-J 2005 Batch के Senior Judicial Officers की याचिका

Old Pension Scheme (OPS) की बहाली: PCS-J 2005 Batch के Senior Judicial Officers की याचिका
Spread the love

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून, 20 सितंबर 2025

Old Pension Scheme (OPS) की बहाली: PCS-J 2005 Batch के Senior Judicial Officers की याचिका

उत्तराखंड में राज्य कर्मचारी और विशेषकर न्यायिक अधिकारियों के लिए लंबे समय से चली आ रही पेंशन व्यवस्था विवाद का नया मोड़ सामने आया है। PCS-J 2005 भर्ती बैच के 30 वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने राज्य उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर पुराने पेंशन स्कीम (OPS) के लाभ पुनः प्रदान करने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के समय उन्हें OPS के तहत पेंशन का लाभ देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में इस सुविधा को हटाकर नई पेंशन स्कीम लागू कर दी गई।

भर्ती प्रक्रिया और OPS का वादा
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब वे 2005 में PCS-J के रूप में भर्ती हुए थे, तब भर्ती दस्तावेजों और सरकारी आदेशों में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि उन्हें सेवा के दौरान OPS के तहत पेंशन का लाभ मिलेगा। उस समय यह सुविधा उनके करियर का अभिन्न हिस्सा थी और इसी आधार पर उन्होंने अपने सेवा-नियोजन और वित्तीय योजना बनाई।

लेकिन वर्ष 2006 के बाद राज्य सरकार ने नई पेंशन स्कीम लागू कर दी, जिसमें इस बैच के अधिकारियों को OPS का लाभ नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि भर्ती समय की शर्तों का उल्लंघन हुआ है और इसे सुधारना न्यायसंगत है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिकाकर्ता अधिकारियों का कहना है कि पेंशन केवल एक वित्तीय सुरक्षा का साधन नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के सेवा और योगदान का सम्मान भी है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उन्हें भर्ती समय की शर्तों के अनुसार OPS के तहत पेंशन का लाभ प्रदान किया जाए। इसके साथ ही, यदि राज्य सरकार द्वारा किसी प्रकार का सुधारात्मक कदम आवश्यक हो, तो इसके निर्देश भी न्यायालय द्वारा जारी किए जाएँ।

कानूनी विशेषज्ञों की राय
सेवा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले संवैधानिक अधिकारों और सरकारी शर्तों से जुड़े होते हैं। जब किसी कर्मचारी को भर्ती समय पर कोई सुविधा मिलने का आश्वासन दिया गया हो, तो न्यायालय आमतौर पर उसे पूरी तरह बहाल करने की दिशा में निर्णय ले सकता है। ऐसे मामलों में न्यायालय पिछले आदेशों और भर्ती दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही निर्णय देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह याचिका केवल इस बैच के अधिकारियों के हित तक सीमित नहीं रहेगी। अगर उच्च न्यायालय इसमें सकारात्मक निर्णय देता है, तो यह राज्य के अन्य कर्मचारियों के लिए भी मिसाल बनेगा, जिन्हें भर्ती समय पर दी गई सुविधाओं से वंचित किया गया हो।

सरकारी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस याचिका पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर न्यायालय OPS के लाभ बहाल करने का आदेश देता है, तो सरकार को वित्तीय व्यवस्थाओं में सुधार करना पड़ेगा। इसके साथ ही यह मुद्दा आगामी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों के बीच चर्चा का केंद्र बन सकता है।

भविष्य की संभावनाएँ
इस याचिका की सुनवाई अगले कुछ हफ्तों में होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के निर्णय से न केवल इस बैच के अधिकारियों के वित्तीय हित सुरक्षित होंगे, बल्कि यह राज्य में पेंशन और सेवा शर्तों के पालन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

दैनिक प्रभातवाणी
PCS-J 2005 भर्ती बैच के वरिष्ठ अधिकारियों की यह याचिका कर्मचारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि भर्ती समय पर दिए गए आश्वासनों का सम्मान किया जाएगा या नहीं। यह मामला उत्तराखंड राज्य में सेवा सुरक्षा और कर्मचारियों के विश्वास की मिसाल के रूप में देखा जा सकता है।