February 20, 2026

UKSSSC पेपर लीक प्रकरण पर गरजी कांग्रेस, 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास कूच का ऐलान

UKSSSC पेपर लीक प्रकरण पर गरजी कांग्रेस, 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास कूच का ऐलान
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देहरादून, 3 अक्टूबर 2025 / दैनिक प्रभातवाणी

देहरादून। उत्तराखंड में रोजगार परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठते सवाल और युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंताओं ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। UKSSSC पेपर लीक प्रकरण राज्य की राजनीति में पिछले दो वर्षों से सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और अब कांग्रेस ने इस मामले में सरकार को घेरने की ठान ली है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि 3 अक्टूबर को प्रदेश भर के कार्यकर्ता, छात्र और बेरोजगार युवा देहरादून में एकत्र होकर मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करेंगे।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पेपर लीक मामले में सरकार की नाकामी ने लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं और अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केवल “जांच के नाम पर समय बिताने” का काम कर रही है, जबकि असली गुनहगारों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।


पेपर लीक प्रकरण

UKSSSC (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) का गठन युवाओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरियों में अवसर देने के लिए किया गया था। आयोग की जिम्मेदारी पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करने की होती है। लेकिन बीते वर्षों में सामने आए पेपर लीक कांड ने आयोग की साख पर गहरा धब्बा लगा दिया।

युवाओं का आरोप है कि हर बार जब कोई भर्ती परीक्षा होती है, तो पेपर आउट होने की खबरें सामने आ जाती हैं। इस कारण उनकी मेहनत और सपने मिट्टी में मिल जाते हैं। कई परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा, जिससे अभ्यर्थियों में गुस्सा और आक्रोश लगातार बढ़ता गया।

सरकार ने जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी, कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन फिर भी युवाओं का भरोसा बहाल नहीं हो सका। यही कारण है कि यह मुद्दा बार-बार चुनावी राजनीति का केंद्र बन रहा है।


कांग्रेस का आक्रोश

कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं। पार्टी का कहना है कि वर्तमान सरकार युवाओं को रोजगार देने के नाम पर सिर्फ “झूठे वादे” कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल बड़े चेहरों को बचाया जा रहा है और छोटे दलालों को पकड़कर सरकार दिखावा कर रही है।

कांग्रेस का यह भी कहना है कि बेरोजगारों की आवाज को लंबे समय से दबाया जा रहा है। आंदोलनरत युवाओं पर कई बार लाठीचार्ज किया गया, उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह युवाओं के हक की लड़ाई सड़क से विधानसभा तक लड़ने को तैयार है।


3 अक्टूबर का मुख्यमंत्री आवास मार्च

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि 3 अक्टूबर को सुबह से ही देहरादून के विभिन्न हिस्सों से कांग्रेस कार्यकर्ता और छात्र संगठन के सदस्य गांधी पार्क में एकत्र होंगे। इसके बाद जुलूस की शक्ल में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया जाएगा।

इस दौरान सरकार से तीन मुख्य मांगें उठाई जाएँगी –

  1. पेपर लीक प्रकरण में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।

  2. सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई और बड़े राजनीतिक संरक्षणकर्ताओं का पर्दाफाश।

  3. प्रभावित परीक्षाओं को जल्द से जल्द दोबारा आयोजित कराना।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि सरकार ने युवाओं की आवाज नहीं सुनी तो यह आंदोलन राज्यव्यापी जनांदोलन का रूप ले सकता है।


युवाओं की उम्मीद और आक्रोश

बेरोजगार संगठन और छात्र परिषद भी इस मुद्दे पर लंबे समय से सरकार से जवाब मांग रहे हैं। कई बार उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया, लेकिन संतोषजनक नतीजा सामने नहीं आया। एक युवा अभ्यर्थी का कहना था – “हमने दिन-रात पढ़ाई की, उम्मीद थी कि मेहनत से नौकरी मिलेगी। लेकिन जब हर परीक्षा से पहले ही पेपर बिक जाता है, तो मेहनत का कोई मतलब नहीं रह जाता।”

दूसरे अभ्यर्थी ने कहा – “सरकार जांच की बात करती है, लेकिन जिन लोगों ने लाखों रुपए लेकर भविष्य बेचा है, वे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। यह हमारे साथ सबसे बड़ा अन्याय है।”

युवाओं का मानना है कि अगर इस बार भी उनकी आवाज अनसुनी की गई, तो वे खुद सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।


राजनीतिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि UKSSSC पेपर लीक प्रकरण अब केवल रोजगार का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे-सीधे “विश्वास के संकट” में बदल गया है। सरकार पर भरोसा खो चुके युवाओं का गुस्सा आगामी चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है।

कांग्रेस इसे अपने लिए अवसर मान रही है। पार्टी लगातार युवाओं के मुद्दों को उठाकर यह संदेश देना चाहती है कि वह बेरोजगारों की सच्ची हमदर्द है। वहीं, भाजपा सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह पारदर्शी कार्रवाई दिखाकर युवाओं का विश्वास दोबारा हासिल करे।


सरकार की सफाई

वहीं, दूसरी ओर सरकार ने साफ किया है कि वह इस प्रकरण को लेकर गंभीर है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया कि कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

लेकिन विपक्ष और युवाओं का कहना है कि यह “दावे केवल कागजों पर” हैं। जब तक बड़े अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस कांड का सच सामने नहीं आएगा।


बेरोजगारी का बड़ा सवाल

उत्तराखंड में बेरोजगारी पहले से ही बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य बनने के 25 साल बाद भी युवाओं को स्थायी और सुरक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहा। ऐसे में जब भर्ती परीक्षाओं पर ही सवाल उठने लगें, तो यह समस्या और गहरी हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार परीक्षाओं की पारदर्शिता बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह समस्या राज्य के सामाजिक ताने-बाने और युवाओं की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डाल सकती है।


आगे की राह

कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पार्टी ने प्रदेशभर में “रोजगार बचाओ यात्रा” और “युवा संवाद” कार्यक्रम शुरू करने की भी तैयारी कर ली है।

वहीं, भाजपा सरकार के लिए यह प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती है। अगर 3 अक्टूबर को कांग्रेस का आंदोलन बड़ा रूप लेता है तो सरकार की साख पर सीधा असर पड़ सकता है।


दैनिक प्रभातवाणी

UKSSSC पेपर लीक कांड केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य, रोजगार की पारदर्शिता और सरकार पर भरोसे का प्रश्न बन चुका है। कांग्रेस के 3 अक्टूबर के मुख्यमंत्री आवास कूच से यह साफ हो गया है कि अब यह लड़ाई और भी तेज होगी।

सवाल यह है कि क्या सरकार युवाओं की आवाज सुनेगी और दोषियों को कठोर सजा दिलाएगी, या फिर यह मामला भी केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। फिलहाल, 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश की निगाहें देहरादून पर टिकी रहेंगी, जब कांग्रेस सड़कों पर उतरकर सरकार से जवाब मांगेगी।