January 12, 2026

Uttrakhand Cabinet के ऐतिहासिक फैसले: ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीकी विकास को मिली रफ्तार

uttrakhnd cabinet के ऐतिहासिक फैसले
Spread the love

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून, 9 जुलाई 2025
उत्तराखंड कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले: ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीकी विकास को मिली रफ्ता

राज्य के विकास को नई दिशा देने के लिए उत्तराखंड सरकार ने 9 जुलाई को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, साइबर फॉरेंसिक, अवसंरचना की निगरानी और खनिज संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग को लेकर कई प्रस्ताव पारित किए गए। यह बैठक न केवल प्रशासनिक रूप से, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक मानी जा रही है।

 जीओथर्मल ऊर्जा नीति 2025 को मिली मंजूरी

कैबिनेट की बैठक में “उत्तराखंड जीओथर्मल ऊर्जा नीति 2025” को मंजूरी दी गई। यह निर्णय राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तराखंड के कई इलाकों—विशेष रूप से पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमोली—में प्राकृतिक गर्म जल स्रोत (Hot Springs) पाए जाते हैं। इनसे निकलने वाली भाप और गर्म जल ऊर्जा उत्पादन के लिए बेहद उपयोगी हैं।

सरकार का उद्देश्य इस नीति के तहत:

  • जीओथर्मल ऊर्जा के क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना,

  • अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करना,

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना,

  • और राज्य को ग्रीन एनर्जी प्रदेश के रूप में स्थापित करना है।

इस नीति के क्रियान्वयन से राज्य का कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने की दिशा में प्रभावी कदम माना जाएगा।

🔬 टैक्स विभाग में डिजिटल फॉरेंसिक लैब की स्थापना

राज्य सरकार ने टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक लैब की स्थापना का निर्णय लिया है। यह लैब वित्त और कर विभाग के अंतर्गत काम करेगी और इसका उद्देश्य डिजिटल माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी, टैक्स चोरी, जीएसटी घोटालों और दस्तावेज़ों की जालसाजी को रोकना होगा।

लैब में अत्याधुनिक साइबर फॉरेंसिक टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा, जो डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से जांच करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, प्रशिक्षित साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति भी की जाएगी जो डिजिटल ठगी और डेटा मैनिपुलेशन जैसे अपराधों की तह तक पहुँचने में सक्षम होंगे।

यह पहल सरकारी राजस्व की चोरी को रोकने के साथ-साथ व्यापारिक पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगी।

ब्रिज सेफ्टी के लिए PMU और निगरानी तंत्र को मजबूती

उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है जहाँ भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएँ अक्सर पुलों और सड़कों की स्थिति को नुकसान पहुँचाती हैं। ऐसे में ब्रिज सेफ्टी मैनेजमेंट राज्य के लिए एक अत्यंत संवेदनशील विषय रहा है।

इस पृष्ठभूमि में, कैबिनेट ने राज्यभर में पुलों की सुरक्षा की निगरानी के लिए एक “ब्रिज सेफ्टी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU)” के गठन की घोषणा की है।

इस यूनिट की जिम्मेदारियों में शामिल होंगे:

  • सभी पुराने और नए पुलों की सुरक्षा ऑडिट,

  • नियमित जांच और मेंटेनेंस,

  • और आपात स्थिति में तत्काल संचार और मरम्मत तंत्र

साथ ही, निगरानी प्रणाली को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे पुलों की वास्तविक समय की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। इससे न केवल दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि राज्य की बुनियादी संरचना भी सशक्त बनेगी।

 खनिज ट्रस्ट नियमों में संशोधन

राज्य सरकार ने खनन से संबंधित “मिनरल ट्रस्ट नियमों” में भी सुधार करने का निर्णय लिया है। अब खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग अधिक पारदर्शी और विकासोन्मुख तरीके से किया जाएगा।

इन संशोधनों के अंतर्गत:

  • खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी,

  • ट्रस्ट द्वारा लिए गए निर्णयों को जनता के लिए सार्वजनिक किया जाएगा,

  • और खर्चों की निगरानी हेतु स्वतंत्र लेखा प्रणाली लागू की जाएगी।

इस कदम से न केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित होगा, बल्कि सामाजिक असंतुलन और विरोध जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।

 पारदर्शिता और सुशासन की ओर एक बड़ा कदम

राज्य सरकार के इन निर्णयों से स्पष्ट है कि वर्तमान नेतृत्व न केवल विकास को लेकर प्रतिबद्ध है, बल्कि पर्यावरण, तकनीक और सामाजिक न्याय को भी समान महत्व दे रहा है। इन सभी पहलों का सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा—चाहे वह स्वरोजगार के अवसर हों, सरकारी सेवा की पारदर्शिता हो या बुनियादी ढांचे की मजबूती।

 मुख्यमंत्री धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के निर्णयों के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा,

“हमारा लक्ष्य एक ऐसा उत्तराखंड बनाना है जो ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो, तकनीकी रूप से सक्षम हो, और जहाँ हर नागरिक को सुरक्षा और विकास की गारंटी मिल सके। जीओथर्मल नीति से लेकर ब्रिज सेफ्टी तक, हर निर्णय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।”

दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड सरकार के ये फैसले राज्य के आने वाले वर्षों के लिए दिशा निर्धारक साबित हो सकते हैं। नीतियाँ जितनी आधुनिक हैं, उतनी ही स्थानीय संसाधनों और समस्याओं पर आधारित भी हैं। यदि इनका सही क्रियान्वयन होता है, तो उत्तराखंड आने वाले समय में पर्यावरणीय संतुलन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।