January 12, 2026

उत्तराखंड में दिसंबर 2025 से बाहरी वाहनों पर “ग्रीन टैक्स” लागू, पर्यावरण और राजस्व दोनों पर रहेगा असर

उत्तराखंड में दिसंबर 2025 से बाहरी वाहनों पर “ग्रीन टैक्स” लागू, पर्यावरण और राजस्व दोनों पर रहेगा असर
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दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट
स्थान: देहरादून | दिनांक: 26 अक्टूबर 2025

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की सीमाओं से प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने का फैसला लिया है। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में राज्य की बड़ी नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार की योजना है कि दिसंबर 2025 से यह नया हरित कर पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा, जिसके बाद अन्य राज्यों से आने वाले निजी वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों और भारी मालवाहक ट्रकों पर यह टैक्स लिया जाएगा। इससे अनुमान है कि उत्तराखंड को सालाना 100 से 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जो राज्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं, वनों की निगरानी और पर्वतीय पारिस्थितिकी को बचाने में उपयोग किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड एक अत्यंत संवेदनशील हिमालयी राज्य है जहाँ हर साल पर्यटन के चलते लाखों वाहन प्रवेश करते हैं। इस बढ़ते दबाव के कारण प्रदूषण में वृद्धि हो रही है और पर्वतीय ढलानों पर सड़क दुर्घटनाओं सहित पर्यावरणीय जोखिम भी बढ़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि बाहरी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर कुछ हद तक नियंत्रण हो सके और राज्य का प्राकृतिक संतुलन सुरक्षित रखा जा सके।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि ग्रीन टैक्स की दरों को अंतिम रूप देने का कार्य तेजी से जारी है। टैक्स कितना होगा, किन-किन प्रकार के वाहनों पर लागू होगा, और उत्तराखंड के निवासी यदि बाहर पंजीकृत वाहन राज्य में लेकर प्रवेश करेंगे तो उनकी स्थिति क्या होगी—इन सभी बिंदुओं पर एक विस्तृत नीति जल्द जारी होगी। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड में स्थायी रूप से रहने वाले नागरिकों को अत्यधिक बोझ से बचाने के लिए अलग प्रावधान रखे जाएंगे, लेकिन उनके लिए भी नियम तय होंगे ताकि टैक्स चोरी और बाहरी पंजीकरण का दुरुपयोग न किया जा सके।

पर्यटन उद्योग से जुड़े कई लोग इस फैसले को लेकर चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा, मसूरी, नैनीताल, औली और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले यात्रियों की संख्या पर इसका असर पड़ सकता है। यदि टैक्स भारी हुआ तो पर्यटक अपने वाहन लेकर आने के बजाय अन्य विकल्प अपनाएँगे या संभव है कि पर्यटकों की संख्या में कुछ कमी देखने को मिले। इससे पर्यटन उद्योग और उससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

इसके उलट पर्यावरण विशेषज्ञ इसे प्रदेश की भलाई के लिए आवश्यक मानते हैं। उनके अनुसार पर्वतीय पर्यावरण अत्यंत संवेदनशील होता है और यहाँ सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ने से न केवल वायु गुणवत्ता बिगड़ती है बल्कि सड़कें टूटने, भूमि कटाव और ध्वनि प्रदूषण में भी तेजी आती है। यदि ग्रीन टैक्स लागू होने से वाहनों की संख्या में थोड़ी कमी आती है, तो यह उत्तराखंड की प्रकृति और स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि ग्रीन टैक्स से प्राप्त राशि का एक बड़ा हिस्सा ईएमएस सिस्टम (Environmental Monitoring System), सड़क सुरक्षा सुधार, नदी घाटी क्षेत्रों की सुरक्षा और वायु गुणवत्ता मापने वाले नवीन उपकरणों की स्थापना पर खर्च किया जाएगा। साथ ही प्रमुख पर्यटक मार्गों पर पार्किंग प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशंस और सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता सुधार भी प्राथमिकता में शामिल होंगे।

यह फैसला उत्तराखंड के साथ-साथ देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि उत्तराखंड के बाद हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे अन्य पर्वतीय राज्य भी ऐसे उपाय अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। केंद्र सरकार पहले ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्यों को कड़े कदम उठाने की सलाह दे चुकी है, और इस दृष्टि से उत्तराखंड ने एक साहसिक पहल पेश की है।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण होगा कि टैक्स लागू करते समय राज्य सरकार पारदर्शी व्यवस्था अपनाए, ताकि किसी भी वाहन चालक को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए विभिन्न एंट्री पॉइंट्स पर डिजिटल भुगतान प्रणाली, ऑटोमेटिक टोल नाके, ऑनलाइन टैक्स भुगतान पोर्टल और वाहन नंबर से टैक्स स्वत: कैलकुलेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग अपेक्षित है। यदि व्यवस्था स्पष्ट और सुविधाजनक नहीं हुई, तो यात्रियों में असंतोष बढ़ सकता है और लागू होने के बाद नई समस्याओं को जन्म दे सकती है।

उत्तराखंड के कई नागरिक भी सवाल पूछ रहे हैं कि यदि वे किसी अन्य राज्य में पंजीकृत वाहन खरीदते हैं या किराए पर लेते हैं, तो क्या उन्हें हर बार राज्य में प्रवेश के लिए टैक्स देना पड़ेगा? सरकार का कहना है कि स्थानीय निवासियों की आवश्यकताओं को समझते हुए उनके लिए विशेष छूट या पंजीकरण मानदंड बनाए जाएंगे, ताकि उनकी दैनिक जीवन शैली प्रभावित न हो।

कुल मिलाकर यह फैसला जहाँ एक ओर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तराखंड को एक नए युग में प्रवेश कराने का लक्ष्य रखता है, वहीं राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र के लिए यह एक संतुलन साधने की चुनौती भी लेकर आया है। आने वाले महीनों में यह देखना रोचक होगा कि ग्रीन टैक्स की अंतिम नीति कैसी बनती है और इसका राज्य पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ता है। यदि यह नीति सफल होती है, तो उत्तराखंड खुद को हरा-भरा और स्वच्छ बनाए रखने की दिशा में देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।