January 12, 2026

उत्तराखंड में ₹800 करोड़ की चिट फंड धोखाधड़ी: हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया

उत्तराखंड में ₹800 करोड़ की चिट फंड धोखाधड़ी: हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया
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उत्तराखंड में ₹800 करोड़ की चिट फंड धोखाधड़ी: हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया

देहरादून, 24 सितंबर 2025:
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य में सामने आए ₹800 करोड़ की चिट फंड धोखाधड़ी की जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को आदेश दिया है। यह आदेश राज्य में वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों और राज्य पुलिस द्वारा प्रभावी जांच में देरी के मद्देनजर आया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में निष्पक्ष और गहन जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है, ताकि निवेशकों और आम जनता के विश्वास को बहाल किया जा सके।

यह घोटाला राज्य के कई जिलों में कई वर्षों से चल रहा था। इस योजना के तहत आम जनता से भारी रकम जुटाई गई, लेकिन निवेशकों को वादे के अनुसार लाभ नहीं दिया गया। कुल धोखाधड़ी की राशि लगभग ₹800 करोड़ बताई जा रही है, जिससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।


घोटाले का इतिहास और विस्तार

जानकारी के अनुसार, यह चिट फंड घोटाला राज्य के उत्तरकाशी, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जिलों में लंबे समय से चल रहा था। इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर लोगों को आकर्षक ब्याज दरों का लालच देकर निवेश करने के लिए उकसाया गया।

  • प्रारंभिक वर्षों में यह योजना छोटी लगती थी, लेकिन समय के साथ इसमें शामिल राशि करोड़ों में बदल गई।

  • निवेशकों की संख्या हजारों में थी, जिनमें अधिकांश छोटे और मध्यम वर्ग के लोग थे।

  • यह घोटाला केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों की आत्मा-विश्वास और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लग गया।

राज्य के वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के चिट फंड घोटाले आम जनता के लिए गहरी क्षति का कारण बनते हैं। निवेशकों ने अपनी जीवन भर की बचत इस योजना में लगा दी थी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ।


हाई कोर्ट का आदेश और जांच का महत्व

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य पुलिस द्वारा मामले की जांच अधूरी और प्रभावित रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल राज्य स्तर की जांच से वास्तविक दोषियों की पहचान और पैसों का हिसाब नहीं लगाया जा सकता, इसलिए CBI को जांच सौंपना आवश्यक है।

कोर्ट ने निर्देश दिए कि CBI इस घोटाले में शामिल सभी लोगों और उनके नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग दस्तावेज और सम्पत्तियों का गहन विश्लेषण करे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव जांच में बाधा न बने।

CBI सूत्रों के अनुसार, एजेंसी जल्द ही इस मामले में टीम का गठन कर फोरेंसिक ऑडिट, बैंक ट्रांजेक्शन की जांच और संदिग्ध व्यक्तियों की गिरफ्तारियों की कार्रवाई शुरू कर देगी।


घोटाले का प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया

चिट फंड घोटाले के कारण राज्य में आम जनता में भारी चिंता और गुस्सा है। कई लोग अपनी पूरी जीवन भर की बचत खो चुके हैं।

  • देहरादून के एक निवेशक ने कहा, “हमने अपनी बचत और भविष्य के लिए पैसे लगाए थे। अब CBI जांच से हमें उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और हमारा पैसा वापस आएगा।”

  • हरिद्वार की एक महिला निवेशक ने कहा, “राज्य पुलिस की जांच कई बार धीमी रही। CBI को जिम्मेदारी सौंपना सही कदम है। हमें न्याय की प्रतीक्षा है।”

राज्य में इस घोटाले से प्रभावित लोगों ने कई जिलों में सरकार और न्यायालय के खिलाफ धरना प्रदर्शन और शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि उन्हें न्याय और वित्तीय सुरक्षा की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बड़े घोटाले न केवल निवेशकों को आर्थिक नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि राज्य में वित्तीय विश्वास और निवेश माहौल को भी कमजोर करते हैं।


विशेषज्ञों की राय और विश्लेषण

वित्तीय और कानून विशेषज्ञों ने माना कि इस प्रकार के बड़े पैमाने पर घोटाले की जांच में केंद्रीय एजेंसी ही प्रभावी साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  1. CBI द्वारा फोरेंसिक ऑडिट और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच से निवेशकों की राशि का सटीक हिसाब लगाया जा सकेगा।

  2. चिट फंड संचालकों और उनके सहयोगियों का नेटवर्क और भूमिका स्पष्ट होगी।

  3. भविष्य में राज्य में चिट फंड और निवेश योजनाओं पर कड़ी निगरानी और कानून लागू किए जा सकेंगे।

इसके अलावा, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि राज्य में इस प्रकार के घोटालों की रोकथाम के लिए सख्त नियामक और कानूनी ढांचा आवश्यक है, ताकि आम जनता सुरक्षित निवेश कर सके।


राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि राज्य प्रशासन CBI जांच में पूर्ण सहयोग करेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस घोटाले में शामिल सभी संदिग्धों और उनके सम्पत्तियों की पहचान कर, जप्ती और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह राज्य के निवेशकों और जनता की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम है। हम चाहते हैं कि इस घोटाले में शामिल अपराधियों को सख्त सजा मिले और भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी से बचा जा सके। हम निवेशकों के हित और वित्तीय पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सरकार ने राज्य के सभी जिलों में सतर्कता और निगरानी तंत्र को मजबूत करने का निर्देश भी दिया है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके।


जिलेवार प्रभावित क्षेत्रों का विश्लेषण

इस घोटाले से राज्य के कई जिलों में आम जनता और निवेशकों को नुकसान पहुंचा है:

  • देहरादून और हरिद्वार: इन जिलों में चिट फंड के बड़े नेटवर्क थे, जहां निवेशकों की संख्या हजारों में थी।

  • उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल: ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में निवेशक पूरी बचत चिट फंड में लगा चुके थे।

  • पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल: छोटे व्यवसायी और मध्यम वर्ग के लोग विशेष रूप से प्रभावित हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में निवेशकों को तुरंत वित्तीय राहत और कानूनी मदद उपलब्ध कराना आवश्यक है।


भविष्य की दिशा और संभावित परिणाम

CBI जांच से यह स्पष्ट होगा कि:

  1. इस घोटाले में कौन-कौन लोग शामिल थे।

  2. रकम के लेन-देन और नेटवर्क की संरचना कैसे थी।

  3. भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए राज्य में नियामक और कानूनी ढांचे को मजबूत किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जांच से न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि राज्य में निवेशकों के भरोसे और वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकेगा।


दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड हाई कोर्ट का आदेश राज्य में वित्तीय पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ₹800 करोड़ की चिट फंड धोखाधड़ी ने राज्य के लाखों लोगों की बचत और आत्मविश्वास को प्रभावित किया है।

CBI जांच से न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि निवेशकों को न्याय मिलेगा और भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक मजबूत संदेश जाएगा। राज्य सरकार और न्यायपालिका के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि निवेशक सुरक्षा, न्याय और वित्तीय पारदर्शिता ही प्राथमिकता है।