January 12, 2026

कर्नाटक उच्च न्यायालय का RSS मार्च पर आदेश, प्रशासन को बैठक के लिए निर्देश

कर्नाटक उच्च न्यायालय का RSS मार्च पर आदेश, प्रशासन को बैठक के लिए निर्देश
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कलबुरगी, 25 अक्टूबर: कर्नाटक उच्च न्यायालय की कलबुरगी पीठ ने चित्तापुर जिले और संबंधित तालुक प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आयोजकों के साथ बैठक कर 2 नवंबर को प्रस्तावित ‘पथ संचलन’ (मार्च) के संबंध में निर्णय लें। न्यायमूर्ति एम.जी.एस. कमल ने सुनवाई के दौरान कहा कि “मामले को लंबा न खींचें” और अधिकारियों को सभी पक्षों को संतुलित तरीके से समायोजित करने की सलाह दी।

अदालत ने यह आदेश प्रशासन और आयोजकों के बीच समन्वय स्थापित करने और किसी भी प्रकार की असुविधा या सुरक्षा चुनौती से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर सहमति बनाने के उद्देश्य से दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

आदेश की पृष्ठभूमि

RSS द्वारा प्रस्तावित पथ संचलन (मार्च) को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ नागरिक और राजनीतिक समूहों द्वारा विरोध जताया गया था। मार्च की अनुमति और मार्ग का चयन प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण विषय बन गया था। ऐसे में अदालत ने हस्तक्षेप कर अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी पक्षों को शामिल करते हुए शांतिपूर्ण समाधान निकालें।

न्यायालय के अनुसार, किसी भी प्रकार का आयोजन बिना प्रशासनिक समन्वय के किया जाए तो इससे सार्वजनिक व्यवस्था बाधित हो सकती है। इसलिए अदालत ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से कहा कि 28 अक्टूबर तक RSS के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाए और 2 नवंबर के मार्च पर निर्णय लिया जाए।

प्रशासन की तैयारी और जिम्मेदारियां

चित्तापुर जिले और तालुक प्रशासन को आदेश के अनुसार निम्नलिखित जिम्मेदारियां निभानी हैं:

  1. बैठक का आयोजन: 28 अक्टूबर तक RSS के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करना अनिवार्य है। बैठक में मार्च के मार्ग, समय और सुरक्षा उपायों पर चर्चा होगी।

  2. मार्च की अनुमति: बैठक के आधार पर मार्च की अनुमति और आवश्यक व्यवस्थाओं का निर्णय लिया जाएगा।

  3. सुरक्षा और व्यवस्था: प्रशासन को सभी सुरक्षा बलों की तैनाती, मार्ग बंद करने, यातायात नियंत्रण और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की तैयारी करनी होगी।

  4. सभी पक्षों का समन्वय: अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वे सभी पक्षों की चिंताओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।

  5. समय पर निर्णय: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले को लंबा खींचने से बचें और सभी व्यवस्थाओं को समय पर अंतिम रूप दें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से यह सुनिश्चित होगा कि मार्च शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो और किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक परेशानी की संभावना न्यूनतम रहे।

RSS मार्च की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का यह मार्च सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक गतिविधियों के रूप में आयोजित किया जाता है। मार्च का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में संगठन की गतिविधियों और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना होता है। हालांकि, इस बार कुछ स्थानीय समूहों और नागरिकों ने मार्च को लेकर विरोध जताया, जिसके कारण प्रशासन और आयोजकों के बीच स्पष्ट समन्वय की आवश्यकता महसूस हुई।

RSS के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ बैठक में मार्च के मार्ग और समय के संबंध में सुझाव दिए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि आयोजन शांतिपूर्ण होगा और सार्वजनिक संपत्ति को कोई क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च न्यायालय का यह आदेश समय पर लिया गया उचित कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले मार्चों और आयोजनों में प्रशासन और आयोजकों के बीच समन्वय न होने पर हिंसा, विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवधान की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञ डॉ. वी.के. शर्मा ने बताया, “अदालत ने जो निर्देश दिए हैं, वे प्रशासन और आयोजकों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन को सभी पक्षों की राय सुननी होगी और सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और मार्ग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।”

नागरिक दृष्टिकोण

स्थानीय नागरिकों ने कहा कि प्रशासन और आयोजकों के बीच बैठक और निर्णय की प्रक्रिया उन्हें विश्वास दिलाती है कि मार्च के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। कई नागरिकों ने कहा कि यदि प्रशासन समय पर तैयारी करता है और सभी पक्षों को संतुलित तरीके से शामिल करता है, तो आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न होगा।

दैनिक प्रभातवाणी

कर्नाटक उच्च न्यायालय का यह आदेश प्रशासन और RSS आयोजकों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि सभी पक्षों के विचारों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए, ताकि मार्च शांतिपूर्ण और विवाद-मुक्त रूप से संपन्न हो सके। अदालत ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई कि वे सभी सुरक्षा उपायों और व्यवस्था को समय पर अंतिम रूप दें।

इस प्रकार, 28 अक्टूबर तक प्रशासन और आयोजकों के बीच बैठक और 2 नवंबर के मार्च के लिए निर्णय एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। इससे न केवल सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित होगी, बल्कि नागरिकों और आयोजकों के बीच विश्वास और सहयोग भी बढ़ेगा।