केदारनाथ यात्रा मार्ग पर संकट: गॉरिकुंड में पानी में मिला 4.9 मिलियन फैकल कोलिफॉर्म, तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा

दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो | गॉरिकुंड, रुद्रप्रयाग | 26 जुलाई 2025
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित गॉरिकुंड से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। हाल ही में किए गए जल परीक्षण में पाया गया कि यहाँ के एक नाले में फैकल कोलिफॉर्म (Fecal Coliform) का स्तर 4.9 मिलियन MPN/100 ml तक पहुँच चुका है, जो कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा 2,500 MPN/100 ml से करीब 2000 गुना अधिक है। यह आंकड़ा न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरा है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है।
तीर्थाटन का दबाव और अधूरी व्यवस्थाएँ बनीं जिम्मेदार
विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के लिए गॉरिकुंड क्षेत्र में अपूर्ण सीवेज ट्रीटमेंट प्रणाली और तीर्थयात्रियों की अत्यधिक संख्या (इस सीजन में लगभग 14 लाख यात्री) प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं। गॉरिकुंड से केदारनाथ तक जाने वाले यात्रियों की बड़ी तादाद के चलते नालों और जलधाराओं में अपशिष्ट और मानव मलजल की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि हुई है।
इस क्षेत्र में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट समुचित रूप से क्रियाशील नहीं है, जिसके कारण मलजल सीधे जलधाराओं में गिर रहा है। परिणामस्वरूप नदी तंत्र में खतरनाक स्तर का प्रदूषण देखा गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा बायो-टॉयलेट्स और ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की बात कही जाती रही है, परंतु जमीनी स्तर पर इनका असर नगण्य है।
क्या होता है फैकल कोलिफॉर्म और कितना खतरनाक?
फैकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मुख्यतः मानव या जानवरों के मल में पाए जाते हैं। यदि इनकी मात्रा पानी में अधिक हो जाए तो वह पानी पीने, नहाने, या अन्य घरेलू उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। इस प्रकार के प्रदूषण से डायरेरिया, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस A/E जैसे गंभीर रोग फैल सकते हैं। तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों का स्वास्थ्य भी खतरे में आ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और एनजीओ की चेतावनी
नेहरू पर्वतीय पर्यावरण संस्थान और अन्य पर्यावरण संरक्षण समूहों ने चेताया है कि यदि इस संकट पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया तो मंडाकिनी नदी, जिसका जल लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा है, गंभीर रूप से प्रदूषित हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का कोलिफॉर्म केवल एक “खुले सीवेज बहाव” की स्थिति में ही पाया जा सकता है, और इसके संपर्क में आने से त्वचा संक्रमण, फूड पॉइज़निंग और अन्य जलजनित रोग फैल सकते हैं।
प्रशासन ने क्या किया?
स्थानीय प्रशासन द्वारा अभी तक केवल नोटिस और निरीक्षण की औपचारिकताएँ की गई हैं। जिला अधिकारी ने इस विषय में राज्य पर्यावरण विभाग और शहरी विकास मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने की बात कही है। वहीं, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यापारियों ने सुनियोजित जल प्रबंधन और सीवेज प्लांट को तत्काल क्रियाशील करने की माँग की है।
सामाजिक प्रभाव और भविष्य की आशंका
यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु यदि बीमार पड़ते हैं तो यह पूरी यात्रा की साख को प्रभावित करेगा।
स्थानीय होटल, धर्मशालाएँ और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
यदि नदी में प्रदूषण फैला तो नीचे के क्षेत्रों में भी जल संकट और बीमारियाँ फैल सकती हैं।
दैनिक प्रभातवाणी
गॉरिकुंड की यह स्थिति उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थयात्रा से उत्पन्न प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव का गंभीर उदाहरण है। अगर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल पर्यावरणीय आपदा बन सकती है बल्कि हजारों लोगों के जीवन और जीविका को भी खतरे में डाल सकती है।