January 11, 2026

पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमयी मौत: पुलिस का दावा दुर्घटना, परिजनों ने जताया संदेह

पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमयी मौत: पुलिस का दावा दुर्घटना, परिजनों ने जताया संदेह
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उत्तरकाशी, 4 अक्टूबर 2025/दैनिक प्रभातवाणी

उत्तरकाशी। उत्तराखंड की पत्रकारिता जगत को झकझोर देने वाली घटना में स्थानीय पत्रकार राजीव प्रताप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उनका शव नदी किनारे दुर्घटनाग्रस्त कार से बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि वे शराब के नशे में गाड़ी चला रहे थे और नियंत्रण खोने से कार नदी में गिर गई। हालांकि, परिवार और सहयोगी पत्रकारों का मानना है कि यह मामला उतना सीधा नहीं है जितना बताया जा रहा है। उनकी राय में इसमें कई ऐसे पहलू हैं जिनकी गहराई से जांच की जानी चाहिए।

इस घटना ने न केवल उत्तरकाशी बल्कि पूरे उत्तराखंड में सनसनी फैला दी है। लोग सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।


राजीव प्रताप कौन थे?

राजीव प्रताप उत्तरकाशी जिले के जाने-माने पत्रकारों में से एक थे। लंबे समय से वे स्थानीय मुद्दों पर लिखते और रिपोर्टिंग करते रहे थे। खासतौर पर सरकारी योजनाओं की खामियाँ, भ्रष्टाचार और आम जनता की समस्याओं को लेकर उनकी कलम बेबाक मानी जाती थी।

उनका अचानक इस तरह जाना पत्रकारिता जगत के लिए बड़ा झटका है। स्थानीय पत्रकार संगठनों का कहना है कि राजीव प्रताप की कार्यशैली से कई बार सत्ता और प्रशासनिक तंत्र असहज महसूस करता था। ऐसे में उनकी मौत को लेकर शंका और गहरी हो गई है।


घटना की जानकारी

पुलिस के अनुसार, राजीव प्रताप देर रात अपनी कार से लौट रहे थे। रास्ते में वाहन अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरा। जब खोजबीन की गई तो कार गहराई में फंसी मिली और भीतर उनका शव बरामद हुआ।

पुलिस ने शुरुआती जांच में दावा किया कि राजीव शराब के नशे में थे। इसी वजह से वे गाड़ी पर नियंत्रण खो बैठे और यह हादसा हुआ।

हालांकि, परिवारजन और करीबी लोग पुलिस की इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजीव शराब का सेवन नहीं करते थे और न ही कभी नशे की हालत में गाड़ी चलाते थे।


परिवार की शंकाएँ

राजीव प्रताप के परिवार ने कहा कि उनकी मौत की कहानी केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं हो सकती। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि बिना पूरी जांच के जल्दबाजी में मामले को दुर्घटना घोषित कर दिया गया।

परिवार के एक सदस्य ने कहा, “राजीव बहुत सतर्क रहते थे। देर रात गाड़ी चलाते समय वे हमेशा सावधानी बरतते थे। पुलिस का यह कहना कि वे नशे की हालत में थे, हमें बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। हम इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।”


पत्रकार संगठनों का रुख

राज्यभर के पत्रकार संगठनों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उत्तराखंड पत्रकार परिषद ने बयान जारी कर कहा कि राजीव प्रताप एक निर्भीक पत्रकार थे, और उनकी मौत के पीछे यदि कोई गहरी साजिश है तो उसे सामने आना चाहिए।

पत्रकार परिषद के अध्यक्ष ने कहा, “हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति या न्यायिक आयोग से कराई जाए। जब तक सत्य सामने नहीं आता, इसे केवल हादसा कहना उचित नहीं होगा।”


सोशल मीडिया पर उठे सवाल

घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। ट्विटर और फेसबुक पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि पुलिस ने इतनी जल्दी इसे दुर्घटना क्यों मान लिया। कुछ ने लिखा कि राजीव प्रताप हाल ही में एक संवेदनशील विषय पर रिपोर्ट कर रहे थे, हो सकता है कि उनकी मौत उससे जुड़ी हो।

लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश मानी जाएगी।


पुलिस का पक्ष

पुलिस का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह एक दुर्घटना का मामला प्रतीत होता है। वाहन में क्षति और घटनास्थल की स्थिति से यही लगता है कि गाड़ी तेज गति में थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा। उन्होंने परिवार और पत्रकारों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक धैर्य रखें।


राजनीति भी हुई गर्म

राजीव प्रताप की मौत ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस और अन्य दलों ने कहा कि सरकार पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।


विशेषज्ञों की राय

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल दुर्घटना का पहलू देखने से काम नहीं चलता। अगर परिवार को शंका है और मृतक पत्रकार संवेदनशील मुद्दों पर काम कर रहे थे, तो विस्तृत जांच जरूरी है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुलिस को घटनास्थल की फोरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान जैसे सभी पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। तभी सच सामने आएगा।


पत्रकार सुरक्षा का बड़ा सवाल

राजीव प्रताप की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्तराखंड और देशभर में पत्रकार सुरक्षित हैं? बीते वर्षों में कई पत्रकारों की संदिग्ध मौतें या हमले सामने आए हैं।

पत्रकारों का मानना है कि यदि उनकी सुरक्षा को लेकर सरकारें गंभीर नहीं हुईं तो निष्पक्ष पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाएगा।


दैनिक प्रभातवाणी

पत्रकार राजीव प्रताप की मौत एक गहरी रहस्यात्मक परतों में लिपटी हुई है। पुलिस इसे दुर्घटना बता रही है, पर परिवार और पत्रकार जगत इसे मानने को तैयार नहीं है। इस विरोधाभास ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार और पुलिस इस घटना की पारदर्शी जांच कर पाएगी? क्या सच सामने आएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

एक निर्भीक पत्रकार की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र की आवाज़ पर हमला है। यही वजह है कि लोग इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।