January 15, 2026

पहली बार विदेश गया गढ़वाली सेब: दुबई तक पहुँची उत्तराखंड की मिठास

पहली बार विदेश गया गढ़वाली सेब: दुबई तक पहुँची उत्तराखंड की मिठास

पहली बार विदेश गया गढ़वाली सेब: दुबई तक पहुँची उत्तराखंड की मिठास

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देहरादून, 21 अगस्त 2025।

उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र प्राकृतिक संपदा और पर्वतीय कृषि के लिए जाना जाता है। यहाँ के बागों में पैदा होने वाले सेब अपनी मिठास, स्वाद और प्राकृतिक खुशबू के कारण अलग पहचान रखते हैं। लेकिन अब तक इन सेबों की पहुँच सिर्फ़ स्थानीय मंडियों और भारत के कुछ राज्यों तक ही सीमित थी। पहली बार ऐसा हुआ है कि गढ़वाल क्षेत्र में उगाए गए सेबों का प्रत्यक्ष निर्यात दुबई किया गया। यह उपलब्धि न सिर्फ़ बागवानों के लिए आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि-आर्थिक तस्वीर भी बदल सकती है।

ऐतिहासिक कदम: गढ़वाली सेब पहुँचे विदेश

गढ़वाल के बागवानों ने इस साल मेहनत से तैयार की गई फसल का एक हिस्सा कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक पैकेजिंग के बाद दुबई भेजा। यह निर्यात उत्तराखंड की कृषि के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले राज्य का सेब विदेशी बाजारों तक सीधे नहीं पहुँच पाया था।

सरकार और निजी कंपनियों की साझेदारी से यह पहल संभव हुई। बागवानों को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने के लिए फलों की क्वालिटी टेस्टिंग, ग्रेडिंग, और वैज्ञानिक पैकेजिंग कितनी ज़रूरी है।

किसानों के चेहरे खिले

पौड़ी और रुद्रप्रयाग ज़िले के कई बागवानों ने बताया कि वे वर्षों से यह सपना देख रहे थे कि उनका सेब सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहुँचे।
स्थानीय किसान गोविंद सिंह राणा का कहना है—
“हमारे पूर्वजों ने सेब की खेती शुरू की थी, लेकिन वे कभी सोच भी नहीं सकते थे कि हमारी फसल एक दिन दुबई तक जाएगी। यह पल हमारे लिए गर्व का है।”

ठंडा श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स का महत्व

इस निर्यात से सबसे बड़ी सीख यह है कि कोल्ड चेन (Cold Chain) और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत किए बिना पर्वतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक नहीं पहुँचाया जा सकता।

  • पहले सेब अक्सर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खराब हो जाते थे।

  • अब आधुनिक रीफर कंटेनर (Reefer Container) और एयर-कार्गो सपोर्ट की मदद से सेब सुरक्षित दुबई पहुँचे।

  • हर खेप से पहले फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट (Plant Health Certificate) लिया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर कोई दिक्कत न हो।

दुबई क्यों चुना गया पहला गंतव्य?

दुबई को शुरुआत में निर्यात करने के पीछे कई कारण हैं:

  1. दुबई का बड़ा भारतीय प्रवासी बाजार, जहाँ गढ़वाली सेब की खासी मांग हो सकती है।

  2. यहाँ की अंतरराष्ट्रीय मंडियाँ (जैसे Dubai Fruit Market) नए और ताज़ा उत्पादों को तेजी से स्वीकार करती हैं।

  3. ट्रांसपोर्टेशन आसान है क्योंकि भारत से दुबई का एयर-कार्गो नेटवर्क मजबूत है।

उत्तराखंड सरकार की भूमिका

राज्य सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही थी कि बागवानों को सिर्फ़ स्थानीय मंडियों पर निर्भर न रहना पड़े। कृषि विभाग और APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) की मदद से किसानों को ट्रेनिंग दी गई।

  • पैकेजिंग सेंटर बनाए गए।

  • किसानों को Global Good Agricultural Practices (GAP) के बारे में बताया गया।

  • निर्यात से पहले सेब का Residue Analysis Test कराया गया ताकि पता चल सके कि उनमें कोई हानिकारक कीटनाशक न हो।

रोजगार और आर्थिक लाभ

गढ़वाली सेब के निर्यात से यहाँ के युवाओं को नए रोजगार अवसर मिल सकते हैं।

  • बागवानी, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में नई नौकरियाँ पैदा होंगी।

  • अगर हर साल निर्यात बढ़ा तो किसानों की आय दोगुनी होने की संभावना है।

विशेषज्ञों की राय

हॉर्टिकल्चर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले 5 सालों में उत्तराखंड का सेब कश्मीर और हिमाचल के सेब की तरह अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकता है।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. राकेश उपाध्याय बताते हैं—
“गढ़वाली सेब की खासियत इसका स्वाद और प्राकृतिक मिठास है। यदि सरकार स्थायी निर्यात नीति बनाए और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करे तो यह उद्योग हजारों किसानों की जिंदगी बदल सकता है।”

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि यह सफलता बड़ी है, लेकिन इसके सामने चुनौतियाँ भी मौजूद हैं:

  • सेब की क्वालिटी में एकरूपता लाना ज़रूरी है।

  • उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक बागवानी और नई किस्मों का विकास करना होगा।

  • निर्यात लागत अभी भी ज्यादा है, जिसे कम करने के लिए सरकार को सब्सिडी और स्कीम्स लानी होंगी।

भविष्य की राह

गढ़वाली सेब का पहला निर्यात सिर्फ़ एक शुरुआत है। यदि इसे योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया तो उत्तराखंड आने वाले समय में सेब के साथ-साथ कीवी, नाशपाती और अन्य पर्वतीय फलों का भी निर्यात कर सकता है।
यह न सिर्फ़ किसानों की आय बढ़ाएगा बल्कि प्रदेश को Agri-Export Hub बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

दैनिक प्रभातवाणी

गढ़वाल क्षेत्र से दुबई तक पहुँचा सेब सिर्फ़ एक फल नहीं, बल्कि उत्तराखंड के किसानों की मेहनत, सपनों और संभावनाओं की कहानी है। यह साबित करता है कि अगर सही नीतियाँ, तकनीक और मार्केटिंग सपोर्ट मिले तो पर्वतीय कृषि भी दुनिया में अपनी पहचान बना सकती है।