Spread the loveमुंबई, 20 जून – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा जून 2025 की बैठक में लिए गए फैसलों का विवरण शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ। समिति ने कहा कि रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती देश की आर्थिक वृद्धि, उपभोक्ता खपत और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक निर्णायक कदम है।रेपो दर में 0.50% की कटौती: एक साहसिक फैसलालगभग दो सप्ताह पहले आरबीआई ने रेपो दर को घटाकर 0.50% किया था, जो बाजार की उम्मीद से कहीं बड़ा कदम माना गया। इसके साथ ही बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी कटौती की गई, जिससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ी और कर्ज देना सस्ता हुआ।आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा:“आशा है कि यह फ्रंट-लोडेड दर कटौती और तरलता की स्पष्टता आर्थिक एजेंटों को यह भरोसा देगी कि नीतिगत समर्थन उपलब्ध है, जिससे खपत और निवेश में तेजी आएगी।”नीतिगत रुख में बदलाव: ‘समायोज्य’ से ‘तटस्थ’ की ओरआरबीआई ने मौद्रिक नीति के रुख को “समायोज्य (Accommodative)” से बदलकर “तटस्थ (Neutral)” कर दिया है। इसका अर्थ है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की सीमित संभावना है, लेकिन इस समय यह कदम जरूरी था ताकि अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके।मुद्रास्फीति में राहत, नीति में विस्तार की गुंजाइशसमिति ने संकेत दिया कि मई में खुदरा मुद्रास्फीति 2.82% पर आ गई, जो पिछले छह वर्षों में सबसे निचला स्तर है। यह लगातार चौथा महीना है जब मुद्रास्फीति आरबीआई के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी रही। इससे नीति निर्माताओं को दरों में कटौती की जगह मिली।सावधानी की भी दी गई सलाहएमपीसी के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने 25 आधार अंकों की कटौती के पक्ष में मतदान करते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा:“मौद्रिक नीति में अनिश्चितता बरकरार है, और बड़े पैमाने पर तरलता समर्थन दर कटौती से ज्यादा असरदार साबित हो सकता है।”एकमुश्त कटौती ज़्यादा असरदार: राजीव रंजनआरबीआई के कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन ने अपने बयान में कहा:“मौद्रिक नीति का असर समय लेता है, ऐसे में 50 बीपी की एकमुश्त कटौती, दो बार 25-25 बीपी कटौती की तुलना में अधिक प्रभावी है।”पूनम गुप्ता की पहली टिप्पणी: भारत की संभावनाएं मजबूतनवनियुक्त डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता, जो पहली बार एमपीसी बैठक में शामिल हुईं, ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय लाभ, संरचनात्मक सुधार और बुनियादी ढांचे में तेज़ प्रगति उसे दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में सहायक होगी। Post Views: 69 Post navigationउत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: कई जिलों के डीएम बदले, सरकार ने दिए विकास और संतुलन को नए आयाम भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 698.95 अरब डॉलर पर पहुंचा, ऑल-टाइम हाई के करीब