उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, राज्य में शोक की लहर, 20 मई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासन और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ी एक युगांतकारी खबर ने पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डाल दिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे और देश की राजनीति में ईमानदार छवि के लिए प्रसिद्ध Bhuvan Chandra Khanduri का आज देहरादून में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक शोक की लहर फैल गई।

भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने राजनीति को सेवा और अनुशासन का माध्यम माना। वे भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुंचे और लंबे सैन्य करियर के बाद राजनीति में सक्रिय हुए। सेना से राजनीति में आने के बावजूद उन्होंने अपने अनुशासन, ईमानदारी और कठोर प्रशासनिक निर्णयों के लिए अलग पहचान बनाई।

सैन्य सेवा से लेकर राजनीति तक का प्रेरणादायक सफर

भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन एक साधारण राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुशासित सैन्य अधिकारी की प्रेरणादायक कहानी रहा है। सेना में रहते हुए उन्होंने देश की सेवा की और उसके बाद राजनीति में प्रवेश कर उत्तराखंड और देश की सेवा का नया अध्याय शुरू किया।

वे केंद्र सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान कैबिनेट मंत्री भी रहे, जहां उन्होंने सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में काम किया। उनके कार्यकाल में कई राष्ट्रीय परियोजनाओं को गति मिली, जिन्हें आज भी देश के बुनियादी ढांचे की रीढ़ माना जाता है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सख्त प्रशासन की पहचान

उत्तराखंड राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रशासनिक सख्ती, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर कड़े रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने राज्य में सरकारी व्यवस्था को अनुशासित और जवाबदेह बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

उनकी पहचान ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में रही, जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक दबाव के निर्णय लेने की छवि बनाई। यही कारण है कि उन्हें “ईमानदार मुख्यमंत्री” के रूप में व्यापक पहचान मिली।

राजनीतिक जीवन और संसदीय योगदान

भुवन चंद्र खंडूरी पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए, जो उनके प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे।

उनकी राजनीतिक यात्रा में उन्होंने संगठनात्मक मजबूती, विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया। वे उन नेताओं में से थे जिन्होंने राजनीति को व्यक्तिगत लाभ के बजाय जनसेवा का माध्यम माना।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

उनके निधन की खबर से सबसे अधिक आघात उनके परिवार को लगा है। उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष Ritu Khanduri Bhushan भी इस दुखद क्षति से बेहद व्यथित हैं। परिवार और निकट सहयोगियों ने इसे व्यक्तिगत और राज्य दोनों के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

मुख्यमंत्री और नेताओं की शोक संवेदनाएं

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य ने एक ऐसा नेता खो दिया है, जिसने ईमानदारी और अनुशासन की राजनीति को नई ऊंचाई दी।

इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, पूर्व मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने भी उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।

अंतिम संस्कार की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का अंतिम संस्कार 20 मई को पूरे राजकीय और पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। देहरादून में प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बड़ी संख्या में लोगों के अंतिम विदाई में शामिल होने की संभावना है, जिसमें राजनीतिक हस्तियों के साथ आम नागरिक भी शामिल होंगे।

राज्यभर में शोक की लहर

उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक का माहौल बन गया। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके कार्यकाल को याद कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें “ईमानदारी की राजनीति का प्रतीक” बताया।

देहरादून से लेकर पहाड़ों तक, हर जगह लोग उनके योगदान को याद कर भावुक दिखाई दिए। प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में उनकी कमी को लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

एक युग का अंत

भुवन चंद्र खंडूरी का जाना केवल एक नेता का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है, जिसमें राजनीति को अनुशासन, ईमानदारी और सेवा से जोड़ा जाता था। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

दैनिक प्रभातवाणी इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे तथा शोक संतप्त परिवार और समर्थकों को यह दुख सहने की शक्ति दे।