Spread the loveउत्तराखंड इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूपों का सामना कर रहा है। राज्य के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और लू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग IMD ने देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर सहित कई मैदानी जिलों के लिए अगले 48 घंटों का हीटवेव अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर, लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जंगलों में आग की घटनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। हालांकि इस तपती गर्मी के बीच केदारनाथ धाम से राहत भरी खबर आई है, जहां बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया है। उत्तराखंड के मैदानी जिलों में इस समय भीषण गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, रुद्रपुर और उधम सिंह नगर के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान करने लगती है और दोपहर होते-होते गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने और लगातार साफ मौसम रहने के कारण तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर देखा जा रहा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं के मरीज बढ़ने लगे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अधिक मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप में सिर ढककर निकलने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में भी इस बार गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मसूरी, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में भी तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। मसूरी में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से पर्यटक भी हैरान हैं। आमतौर पर मई के महीने में यहां मौसम सुहावना रहता है, लेकिन इस बार पहाड़ों में भी गर्म हवाओं का असर महसूस किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है और गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ते तापमान का सबसे खतरनाक असर जंगलों पर दिखाई दे रहा है। पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, टिहरी और नैनीताल समेत कई जिलों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। तेज धूप, सूखी घास और गर्म हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई स्थानों पर वन विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। जंगलों में लगी आग से न केवल पेड़-पौधों को नुकसान हो रहा है, बल्कि वन्यजीवों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई इलाकों में धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत तक होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। पहले जहां पहाड़ों में गर्मी सीमित रहती थी, वहीं अब तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। जंगलों में आग की बढ़ती घटनाएं भी इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। हालांकि इस भीषण गर्मी के बीच केदारनाथ धाम से राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। धाम में झमाझम बारिश होने से मौसम ठंडा और सुहावना हो गया है। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिली। केदारनाथ पहुंचे यात्रियों ने बताया कि वहां का मौसम बेहद खुशनुमा हो गया है और ठंडी हवाएं लोगों को सुकून दे रही हैं। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह भी दी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मैदानी इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। प्रशासन की ओर से भी अस्पतालों और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज गर्मी के दौरान पानी की कमी शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए लगातार पानी पीते रहना जरूरी है। उत्तराखंड इस समय मौसम के चरम बदलाव का सामना कर रहा है। मैदानों में तपती गर्मी, पहाड़ों में बढ़ता तापमान, जंगलों में आग और दूसरी ओर केदारनाथ में बारिश — ये सभी संकेत बदलते पर्यावरण और जलवायु की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में मौसम का यह बदलता मिजाज राज्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। Post Views: 2 Post navigation केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा, सोनप्रयाग में पहाड़ी से गिरे पत्थर उत्तराखंड में जंगलों की आग पर बड़ा एक्शन, ‘शीतलाखेत मॉडल’ से 1000 नए वन कर्मियों की होगी भर्ती