Spread the loveउत्तराखंड में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, मौसम के अनुकूल और छात्रों के हित में बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सभी राजकीय एवं निजी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए नई समय-सारिणी जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश के सभी स्कूलों का संचालन वर्षभर दो अलग-अलग मौसमों—ग्रीष्मकाल और शीतकाल—के अनुसार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की तीव्रता को देखते हुए यह निर्णय विद्यार्थियों की सुविधा और शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह संशोधित आदेश प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, उत्तराखंड की ओर से जारी किया गया है, जिसमें पहले 6 अप्रैल 2026 को लागू की गई समय-सारिणी में आंशिक बदलाव करते हुए नई व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में निर्धारित शिक्षण अवधि में कटौती नहीं की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था को मौसम के अनुसार ढालने की नई पहल उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है, जहां मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलता है। गर्मियों में अत्यधिक गर्मी और सर्दियों में कड़ाके की ठंड का प्रभाव सीधे तौर पर बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब स्कूलों का संचालन दो अलग-अलग मौसमीय समय-सारिणी के आधार पर किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को अत्यधिक मौसमीय परिस्थितियों से बचाते हुए एक संतुलित और नियमित शिक्षा व्यवस्था प्रदान की जा सके। साथ ही, शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों की उपस्थिति और प्रदर्शन में सुधार लाया जा सके। ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी (1 अप्रैल से 30 सितंबर तक) नई व्यवस्था के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक प्रदेश के सभी विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी लागू रहेगी। इस अवधि में स्कूलों का संचालन सुबह जल्दी शुरू होगा ताकि तेज धूप और गर्मी से बचा जा सके। विद्यालयों में प्रार्थना सभा का समय सुबह 7:15 बजे से 7:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। पहली कक्षा सुबह 7:30 से 8:10 तक चलेगी, जिसकी अवधि 40 मिनट होगी। दूसरी कक्षा 8:10 से 8:50 तक, तीसरी कक्षा 8:50 से 9:30 तक, और चौथी कक्षा 9:30 से 10:10 तक संचालित होगी। इसके बाद 10:10 से 10:40 तक 30 मिनट का मध्यांतर (ब्रेक) रखा गया है। ब्रेक के बाद पांचवीं कक्षा 10:40 से 11:15 तक, छठी कक्षा 11:15 से 11:50 तक, सातवीं कक्षा 11:50 से 12:25 तक और आठवीं कक्षा 12:25 से 1:00 बजे तक चलेगी। इस प्रकार ग्रीष्मकाल में विद्यालयों का संचालन सुबह 7:15 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस समय-सारिणी से बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी और उनकी पढ़ाई अधिक प्रभावी होगी। शीतकालीन समय-सारिणी (1 अक्टूबर से 31 मार्च तक) उत्तराखंड में सर्दियों के दौरान तापमान काफी नीचे चला जाता है, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में सुबह के समय अत्यधिक ठंड होती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए शीतकालीन समय-सारिणी को थोड़ा देर से शुरू किया गया है। शीतकालीन अवधि में प्रार्थना सभा सुबह 8:45 बजे से 9:00 बजे तक होगी। इसके बाद कक्षाएं क्रमवार संचालित की जाएंगी। पहली कक्षा 9:00 से 9:45 तक, दूसरी कक्षा 9:45 से 10:30 तक, तीसरी कक्षा 10:30 से 11:15 तक और चौथी कक्षा 11:15 से 12:00 बजे तक चलेगी। इसके बाद 12:00 से 12:30 तक मध्यांतर रखा गया है। ब्रेक के बाद पांचवीं कक्षा 12:30 से 1:10 तक, छठी कक्षा 1:10 से 1:50 तक, सातवीं कक्षा 1:50 से 2:30 तक और आठवीं कक्षा 2:30 से 3:10 बजे तक संचालित होगी। इस प्रकार शीतकाल में विद्यालयों का संचालन सुबह 8:45 बजे से दोपहर 3:10 बजे तक किया जाएगा। शिक्षण अवधि में कटौती पर सख्त निर्देश राज्य सरकार ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में शिक्षण अवधि में कोई कमी नहीं की जाएगी। चाहे समय-सारिणी में बदलाव हो या स्थानीय स्तर पर कोई संशोधन, लेकिन पढ़ाई का कुल समय समान ही रहेगा। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो और पाठ्यक्रम समय पर पूरा किया जा सके। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव की सुविधा उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियाँ विविध हैं। कुछ क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम हैं, जहां मौसम, बर्फबारी, भूस्खलन और परिवहन जैसी समस्याएँ आम हैं। ऐसे में सरकार ने यह भी प्रावधान रखा है कि यदि किसी विद्यालय की स्थानीय परिस्थितियाँ समय-सारिणी में बदलाव की मांग करती हैं, तो विद्यालय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में संबंधित जिले के जिलाधिकारी या उनके प्रतिनिधि अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। यह समिति सभी परिस्थितियों का मूल्यांकन कर उचित निर्णय लेगी ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो और सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे। शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने की कोशिश इस नई समय-सारिणी को लागू करने के पीछे सरकार की एक बड़ी मंशा यह भी है कि पूरे राज्य में स्कूलों की कार्यप्रणाली को एक समान और व्यवस्थित किया जा सके। अब तक विभिन्न जिलों और क्षेत्रों में समय-सारिणी में अलग-अलग व्यवस्था देखने को मिलती थी, जिससे कई बार असमानता की स्थिति बन जाती थी। नई व्यवस्था से पूरे प्रदेश में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू होगी, जिससे प्रशासनिक निगरानी भी आसान होगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है। छात्रों और अभिभावकों पर प्रभाव इस निर्णय का सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर भी पड़ेगा। ग्रीष्मकाल में जल्दी स्कूल शुरू होने से बच्चों को दिन के ठंडे समय में पढ़ाई का अवसर मिलेगा, जबकि शीतकाल में देर से शुरू होने से ठंड से राहत मिलेगी। अभिभावकों का मानना है कि यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों के लिए लाभकारी हो सकता है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में यह व्यवस्था अधिक उपयोगी साबित होगी। शिक्षकों की भूमिका और नई चुनौतियाँ नई समय-सारिणी के लागू होने के बाद शिक्षकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। उन्हें निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो। इसके साथ ही डिजिटल और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता भी बढ़ेगी, ताकि सीमित समय में अधिक प्रभावी शिक्षण किया जा सके। Post Views: 5 Post navigation नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शारीरिक शिक्षा भर्ती पर सरकार से जवाब तलब, लैब तकनीशियनों को 2010 से एरियर का अधिकार उत्तराखंड में मौसम का कहर: 5 मई को बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित