Spread the love उत्तराखंड में बेरोजगार बीपीएड (B.P.Ed) और एमपीएड (M.P.Ed) डिग्रीधारकों को शारीरिक शिक्षा शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी न करने के मामले ने एक बार फिर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर नैनीताल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं दूसरी ओर लैब तकनीशियनों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अदालत ने उनके हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2010 से संशोधित वेतनमान और एरियर देने का आदेश दिया है। शारीरिक शिक्षा भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई मामला उन बेरोजगार अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने बीपीएड और एमपीएड जैसे शारीरिक शिक्षा से संबंधित कोर्स किए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 और वर्ष 2025 की नियमावली में कक्षा 1 से 12 तक फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य विषय घोषित किया है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक इन पदों को भरने के लिए कोई भर्ती विज्ञप्ति जारी नहीं की गई। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने के बाद स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी आवश्यकता है, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इसके चलते न केवल प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार से वंचित रहना पड़ रहा है, बल्कि छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शारीरिक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि संबंधित कोर्स करने वाले अभ्यर्थी पूरी तरह योग्य हैं और वे स्कूलों में शारीरिक शिक्षा पढ़ाने की क्षमता रखते हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू न करना असमानता और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। शिक्षा नीति और भर्ती व्यवस्था पर सवाल इस मामले ने एक बार फिर राज्य की शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नई शिक्षा नीति में जहां समग्र शिक्षा और शारीरिक विकास पर जोर दिया गया है, वहीं जमीनी स्तर पर इस नीति को लागू करने में देरी हो रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि नीति केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि स्कूलों में आवश्यक शिक्षक पद खाली पड़े हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं कि आखिर कब तक इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लैब तकनीशियनों के हक में आया अहम फैसला इसी सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में लैब तकनीशियनों को बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि लैब तकनीशियनों को भी वही वेतनमान दिया जाएगा जो डेंटल हाइजीनिस्ट और एक्स-रे तकनीशियनों को दिया गया था। यह मामला लंबे समय से चल रहे वेतन समानता विवाद से जुड़ा था, जिसमें लैब तकनीशियनों ने आरोप लगाया था कि समान कार्य और समान योग्यता के बावजूद उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है। 2010 से मिलेगा एरियर और संशोधित वेतन अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि लैब तकनीशियनों के साथ भेदभाव अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि वित्त विभाग की आपत्तियां वेतन समानता को रोकने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकतीं। खंडपीठ ने आदेश दिया कि लैब तकनीशियनों को 15 अप्रैल 2010 से संशोधित वेतनमान ₹9300–34800 (ग्रेड पे ₹4200) के अनुसार सभी लाभ और एरियर का भुगतान किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए न्यायालय पहुंचे हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार की दलीलें खारिज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह दलील दी थी कि वित्त विभाग की आपत्तियों और कुछ कर्मचारियों द्वारा दिए गए शपथ पत्रों के कारण पुरानी तिथि से लाभ देना संभव नहीं है। लेकिन अदालत ने इन सभी तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि जब कार्य की प्रकृति और पूर्व वेतनमान समान हैं, तो भेदभाव उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इसे एक “मनमाना और अनुचित निर्णय” करार देते हुए सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी। फैसले का असर इस फैसले के बाद राज्य के हजारों लैब तकनीशियनों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है। वहीं शारीरिक शिक्षा भर्ती को लेकर सरकार पर अब जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल कर्मचारियों के हक में है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता के सिद्धांत को भी मजबूत करता है। Post Views: 17 Post navigation उत्तराखंड में मौसम का कहर: कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट उत्तराखंड में स्कूलों की नई समय-सारिणी जारी, 1 अप्रैल से 31 मार्च तक मौसम के अनुसार चलेगा विद्यालयों का संचालन