Spread the love उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट बदल ली है और इसका असर राज्य के कई जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला है। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और उधम सिंह नगर सहित लगभग पूरे प्रदेश में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने न केवल आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा और आवागमन पर भी गंभीर असर डाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार आने वाले कुछ घंटों में भी कई इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के कारण पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात व्यवस्था बाधित हो गई। कई स्थानों पर बिजली की लाइनें टूटने की वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में देर शाम से शुरू हुई बारिश ने देखते ही देखते तेज रूप ले लिया, जिसके चलते कई मोहल्लों में जलभराव जैसी स्थिति भी देखने को मिली। पौड़ी और टिहरी जैसे पहाड़ी जिलों में हालात और भी अधिक संवेदनशील बने हुए हैं। यहां तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय किसानों के अनुसार खेतों में खड़ी सब्जियों और फलों की फसल को काफी हानि पहुंची है, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। कई जगहों पर छोटे भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे ग्रामीण संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं। नैनीताल जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने पर्यटकों को भी प्रभावित किया है। झील क्षेत्र और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पहुंचे सैलानियों को अचानक शुरू हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण सुरक्षित स्थानों पर रुकना पड़ा। होटल और होमस्टे संचालकों के अनुसार कई पर्यटक अपनी यात्रा बीच में ही स्थगित करने पर मजबूर हुए हैं। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम सामान्य होने तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में भी तेज हवाओं और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। कई जगहों पर सड़क किनारे लगे होर्डिंग्स और अस्थायी ढांचे गिर गए, जिससे कुछ स्थानों पर यातायात अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। किसानों के लिए यह बारिश मिश्रित प्रभाव लेकर आई है, जहां एक ओर तापमान में गिरावट से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ गई है। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी मौसम का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर जाने वाले मार्गों पर प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कुछ स्थानों पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने या नियंत्रित करने की स्थिति भी बनाई गई है ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हो गई हैं। जहां-जहां पेड़ गिरे हैं या सड़कें अवरुद्ध हुई हैं, वहां राहत और सफाई कार्य तेजी से किया जा रहा है। बिजली आपूर्ति को बहाल करने के लिए भी संबंधित विभाग लगातार प्रयासरत हैं। प्रशासन ने कहा है कि प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जा रही है जहां जनजीवन अधिक प्रभावित हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव के कारण हुआ है। इसके चलते अगले कुछ दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी रह सकती है। खासकर पहाड़ी जिलों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। देहरादून में कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने से वाहनों को नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में यातायात घंटों बाधित रहा, जिसे बाद में पुलिस और नगर निगम की टीमों ने मिलकर सुचारु कराया। शहर के निचले इलाकों में पानी भरने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। हरिद्वार में भी मौसम का असर साफ दिखाई दिया। गंगा तट पर अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू होने से श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। घाटों पर प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों को नदी किनारे अधिक देर तक न रुकने की सलाह दी है। कुल मिलाकर उत्तराखंड में मौसम का यह अचानक बदला मिजाज एक बार फिर यह दिखाता है कि पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। प्रशासन और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन आम जनता से भी अपील की गई है कि वे पूरी सतर्कता बरतें और अनावश्यक यात्रा से बचें। राज्य में आने वाले 24 से 48 घंटों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी अवधि में मौसम की स्थिति स्पष्ट होगी कि राहत मिलेगी या फिर यह दौर और लंबा खिंच सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश में अलर्ट की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन हर स्तर पर तैयारियों में जुटा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। Post Views: 5 Post navigation देहरादून नगर निगम के फैसलों पर सियासी घमासान, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उठाए गंभीर सवाल नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शारीरिक शिक्षा भर्ती पर सरकार से जवाब तलब, लैब तकनीशियनों को 2010 से एरियर का अधिकार