देहरादून में करंट लगने से श्रमिक की मौत, चार गंभीर रूप से झुलसे; बिजली लाइन से टकराया खंभा
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देहरादून, 16 जून। राजधानी देहरादून के पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत चकराता रोड स्थित पथरीबाग की ओम सिटी सोसाइटी के समीप रविवार को एक दर्दनाक हादसे में एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब बिजली विभाग की आरडीएसएस योजना के तहत विद्युत ढांचे को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा था। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर पहुंची पुलिस व प्रशासनिक टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के अंतर्गत क्षेत्र में बिजली लाइनों और खंभों के उन्नयन का कार्य चल रहा था। यह कार्य एक निजी कंपनी के माध्यम से ठेके पर कराया जा रहा था। रविवार को पांच श्रमिक नया बिजली का खंभा स्थापित करने के कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान खंभा अचानक ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की चालू हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। लाइन में करंट प्रवाहित होने के कारण पूरा खंभा विद्युत प्रवाह की चपेट में आ गया और वहां कार्य कर रहे सभी श्रमिकों को तेज करंट लग गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करंट लगते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और घटना की सूचना पुलिस एवं आपातकालीन सेवाओं को दी। गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने एक श्रमिक को मृत घोषित कर दिया।

हादसे में उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले निवासी 31 वर्षीय उमेश कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं चार अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में पप्पू और जसमान सहित चार श्रमिक शामिल हैं, जिनका उपचार एक निजी अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है।

पटेलनगर थाना प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हाईटेंशन लाइन के निकट कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक शटडाउन लिया गया था या नहीं तथा श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में तकनीकी लापरवाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों और एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक न तो परिजनों की ओर से और न ही संबंधित विभाग की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी।

इस घटना ने निर्माण एवं विद्युत कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईटेंशन लाइनों के आसपास कार्य करते समय शटडाउन, सुरक्षा किट, इंसुलेटेड उपकरण और प्रशिक्षित पर्यवेक्षण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से लागू की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

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