उत्तराखंड में UCC का पहला बड़ा एक्शन: हरिद्वार में दर्ज हुआ देश का पहला आपराधिक मामला, कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
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Uttarakhand में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू होने के बाद देश का पहला आपराधिक मामला अब कानूनी रूप से अगले चरण में पहुंच गया है। Haridwar जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र में दर्ज इस ऐतिहासिक मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर स्थानीय अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसे उत्तराखंड में UCC के व्यावहारिक क्रियान्वयन का पहला बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

यह मामला विवाह, तीन तलाक, निकाह हलाला और महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ी सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


शाहीन की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

यह ऐतिहासिक प्राथमिकी बुग्गावाला निवासी शाहीन की शिकायत पर दर्ज की गई। पीड़िता ने अपने पति मोहम्मद दानिश, ससुर सईद और परिवार के कुल 9 लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

महिला का आरोप है कि शादी के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत में दहेज उत्पीड़न, मारपीट और जबरन धार्मिक व वैवाहिक दबाव बनाने जैसे आरोप भी शामिल किए गए हैं।


किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई?

इस मामले में पुलिस ने केवल UCC की धाराओं तक सीमित न रहकर कई सख्त कानूनी प्रावधानों को शामिल किया है।

UCC उत्तराखंड 2024

मामले में UCC की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) लगाई गई हैं, जिनमें बलपूर्वक पुनर्विवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध का प्रावधान है।

मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019

तीन तलाक देने के आरोप में अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत कार्रवाई की गई है। यह कानून मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिए गए तीन तलाक को अपराध मानता है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) और दहेज अधिनियम

इसके अलावा दहेज प्रताड़ना, मानसिक यातना, घरेलू हिंसा और मारपीट से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।


पुलिस ने तेजी से पूरी की जांच

Haridwar Police ने मामले की जांच को प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्रवाई की। जांच पूरी होने के बाद Judicial Magistrate-II, Roorkee की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर केस को मजबूत बनाया गया है। अब अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।


महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम

कानूनी विशेषज्ञ इस मामले को महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा मील का पत्थर मान रहे हैं। उनका कहना है कि UCC लागू होने के बाद यह पहला मामला है जिसने कानून को सीधे व्यवहारिक स्तर पर लागू होते दिखाया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे उन महिलाओं को हिम्मत मिलेगी जो लंबे समय से वैवाहिक प्रताड़ना और सामाजिक दबाव का सामना कर रही थीं।


UCC को लेकर फिर तेज हुई बहस

इस मामले के बाद राज्य और देशभर में UCC को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों को समान अधिकार और महिलाओं को अधिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में बड़ा सुधार है।

वहीं कुछ संगठनों का कहना है कि कानून के इस्तेमाल में निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनाए रखना भी जरूरी होगा।