उत्तराखण्ड में UCC के लागू होने का पहला वर्ष पूरा होने पर मनाया गया UCC दिवस, मसूरी का दृश्य, 'UCC Day' बैनर और भारतीय झंडा, राज्य सरकार और जनता के कार्यक्रम को दर्शाता हुआसमान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने के एक वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में UCC दिवस मनाया गया।
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देहरादून  (उत्तराखंड), 26 जनवरी 2026:

  उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) के लागू होने का पहला वर्ष पूरा होने पर आज राज्य स्तर पर “UCC दिवस” मनाया गया। राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में इस कानून की उपलब्धियों, प्रभाव और भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई। राज्य सरकार ने इसे सामाजिक सुधार और न्यायपूर्ण व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए ऐतिहासिक पहल करार दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखण्ड ने देश को समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन में एक नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने, पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता लाने और सामाजिक समानता स्थापित करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जनता से किए गए वादों को पूरा किया है और कानून के लागू होने के बाद विवाह, तलाक और उत्तराधिकार संबंधी मामलों में स्पष्टता आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि UCC 2026 संशोधन अध्यादेश को लागू किया गया है। इसमें शादी और लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में धोखाधड़ी और जबरदस्ती को रोकने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को बेहतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है और रिश्तों के नाम पर होने वाले अपराधों में कमी लाना है।

संशोधन में विशेष रूप से यह ध्यान रखा गया है कि किसी भी रिश्ते में दोनों पक्षों की सहमति स्वैच्छिक और स्पष्ट हो। यदि धोखाधड़ी या जबरदस्ती के तत्व पाए जाते हैं, तो कानून के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी और पारिवारिक विवादों में कानूनी राहत सुनिश्चित होगी।

हालांकि, UCC को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे सनातन धर्म पर हमला बताते हुए आलोचना की है। उनका कहना है कि कानून से परंपराओं और सांस्कृतिक ढांचे पर असर पड़ सकता है और इसे व्यापक जन-परामर्श के बिना लागू किया गया। हरीश रावत ने कहा कि सरकार UCC के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है।

वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि UCC का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उनका कहना है कि समान कानून संविधान की मूल भावना से जुड़ा है और इससे समाज में न्याय और समानता सुनिश्चित होती है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर राजनीतिक कारणों से विरोध करने का आरोप लगाया।

एक साल के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि UCC ने उत्तराखण्ड में सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहन चर्चा को जन्म दिया है। समर्थक इसे ऐतिहासिक सुधार मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे सांस्कृतिक और धार्मिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। आम जनता के बीच भी इसके प्रति मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग इसे समानता की दिशा में आवश्यक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसके व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।

UCC दिवस के माध्यम से राज्य सरकार ने यह संदेश दिया कि वह कानून के कार्यान्वयन में पीछे नहीं हटेगी और समय-समय पर संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाएगी। आगामी महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संशोधित प्रावधान जमीनी स्तर पर कैसे लागू होते हैं और क्या यह कानून उत्तराखण्ड में सामाजिक न्याय और समानता के अपने लक्ष्यों को पूरा कर पाता है।

दैनिक प्रभातवाणी आगे भी UCC से जुड़े सभी कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं पर नजर बनाए रखेगा और पाठकों तक तथ्यपरक, संतुलित और गहन जानकारी पहुंचाता रहेगा।