बॉन्डधारी डॉक्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, दुर्गम सेवा अवधि में मिलेगा पूर्व कार्यकाल का लाभ
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नैनीताल: Uttarakhand High Court ने Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University श्रीनगर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ न दिए जाने के मामले में अहम निर्देश जारी किए हैं। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया कि जिस प्रकार एक कर्मचारी महावीर प्रसाद घिल्डियाल को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया गया है, उसी आधार पर याचिकाकर्ताओं के मामले पर भी विचार करते हुए छह माह के भीतर निर्णय लिया जाए

मामले के अनुसार विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी सतीश चंद्र थपलियाल और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब विश्वविद्यालय श्रीनगर में अपना परिसर स्थापित कर रहा था, तब करीब 96 लोगों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले प्रभावित लोगों को विश्वविद्यालय में लिपिक पद पर नियुक्ति दी गई। इन कर्मचारियों की सेवाएं बाद में वर्ष 2007 में नियमित की गईं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके साथ ही नियुक्त कर्मचारी महावीर प्रसाद घिल्डियाल को विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2004 में नियमित कर दिया था। इस कारण वे पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आ गए, जबकि अन्य कर्मचारियों का नियमितीकरण बाद में होने से उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सका। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति एक साथ हुई थी और वे भी उसी समय से सेवाएं दे रहे थे, इसलिए उन्हें भी समान रूप से पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों की सेवाओं को नियुक्ति की प्रारंभिक तिथि से जोड़ना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग तिथियों पर नियमितीकरण होने से समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि भले ही उनका नियमितीकरण वर्ष 2007 में हुआ हो, लेकिन वे पहले से सेवा में थे, इसलिए उन्हें भी OPS का लाभ दिया जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए छह महीने के भीतर निर्णय लिया जाए। अदालत के इस निर्देश से संबंधित कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।