Spread the love टिहरी गढ़वाल जनपद में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि ने जनजीवन के साथ-साथ किसानों की कमर तोड़ दी है। धनौल्टी क्षेत्र और ब्रह्मसारी गांव में हुई तेज ओलावृष्टि ने जहां प्राकृतिक सुंदरता को कुछ समय के लिए बर्फीली परत से ढक दिया, वहीं खेतों और बागानों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ओले इतनी तेज गति से गिरे कि कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गईं। खासकर नाशपाती और कीवी के बागानों को गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे बागवानों को इस सीजन में बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है। इसके अलावा मटर, मूली, आलू और शिमला मिर्च जैसी नकदी फसलें भी पूरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से ओलावृष्टि हुई है, उससे इस वर्ष की कृषि पैदावार पर गहरा असर पड़ेगा और कई परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। इसी बीच मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए आगामी दिनों में बर्फबारी की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम और अधिक खराब हो सकता है, जबकि मैदानी जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। पारे के लुढ़कने से सुबह और शाम के समय ठंड का असर स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलाव पहाड़ी कृषि और बागवानी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं, खासकर तब जब फसलें तैयार होने के अंतिम चरण में हों। वहीं प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नुकसान के आकलन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है। कुल मिलाकर, टिहरी गढ़वाल का यह मौसमीय बदलाव एक बार फिर यह दिखा रहा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से ग्रामीण जीवन और कृषि व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। Post Views: 3 Post navigation लापता कांस्टेबल संजीव कुमार का शव बरामद, अल्मोड़ा हादसे पर उठे कई गंभीर सवाल देहरादून–मसूरी में ट्रैफिक और पर्यटन का दबाव बढ़ा, वीकेंड पर जाम से हालात बिगड़े