Spread the loveटिहरी: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया। टिहरी जिले के चंबा-सत्यो क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर बिजली के तारों की चपेट में आने के बाद खेतों में इमरजेंसी लैंडिंग करने को मजबूर हो गया। हादसे के समय हेलीकॉप्टर में कुल छह यात्री सवार थे। राहत की बात यह रही कि महिला पायलट अनुपमा चौधरी की सूझबूझ, धैर्य और त्वरित फैसले के कारण सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित बच गए। हालांकि हादसे में हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। खेतों में अचानक हेलीकॉप्टर उतरते ही आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़ पड़े। कुछ देर के लिए लोगों को लगा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, लेकिन बाद में जब यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलते देखा गया तो लोगों ने राहत की सांस ली। स्थानीय ग्रामीणों ने भी यात्रियों की मदद की और प्रशासन को तत्काल सूचना दी। जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर चारधाम यात्रा रूट पर उड़ान भर रहा था। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ान के दौरान बिजली की हाईटेंशन लाइन के बेहद करीब पहुंच गया। इसी दौरान हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा तारों से टकरा गया। टक्कर के साथ ही तेज आवाज हुई और हेलीकॉप्टर में जोरदार कंपन शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा कि हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगड़ गया है और वह दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। बताया जा रहा है कि टक्कर के बाद हेलीकॉप्टर का टेल सेक्शन प्रभावित हो गया था। ऐसी स्थिति किसी भी हेलीकॉप्टर के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि पिछले हिस्से में तकनीकी खराबी आने पर हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगड़ सकता है। लेकिन पायलट अनुपमा चौधरी ने घबराने के बजाय बेहद शांत तरीके से स्थिति को संभाला। उन्होंने तत्काल आसपास सुरक्षित जगह तलाशनी शुरू की और कुछ ही मिनटों में खेतों के बीच हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हेलीकॉप्टर नीचे उतरते समय काफी नीचे झुक रहा था और उसकी आवाज भी सामान्य से अलग सुनाई दे रही थी। खेतों में लैंडिंग के दौरान धूल का बड़ा गुबार उठ गया, जिससे कुछ देर तक दृश्य साफ दिखाई नहीं दिया। हालांकि लैंडिंग सफल रही और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद यात्रियों के चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था। कई यात्री भावुक भी हो गए और पायलट का धन्यवाद करते नजर आए। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए। क्षेत्रीय प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेर लिया ताकि कोई अनहोनी न हो। हेलीकॉप्टर में तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर हेलीकॉप्टर बिजली के तारों के इतना करीब कैसे पहुंच गया। इसके साथ ही उड़ान मार्ग और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है। चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि यहां मौसम तेजी से बदलता है और कई स्थानों पर बिजली की लाइनें तथा संकरे उड़ान मार्ग जोखिम पैदा करते हैं। इस घटना के बाद नागरिक उड्डयन विभाग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। संभावना जताई जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जाएगी। हेलीकॉप्टर कंपनी से भी घटना की रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि हेलीकॉप्टर उड़ानों में पायलट की त्वरित निर्णय क्षमता सबसे अहम होती है और इस घटना में महिला पायलट अनुपमा चौधरी ने जिस तरह संयम और साहस दिखाया, उसने छह लोगों की जान बचा ली। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें “रियल हीरो” बताते हुए सम्मानित करने की मांग की है। घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में मौजूद बिजली लाइन की स्थिति का भी निरीक्षण शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए चारधाम हेलीकॉप्टर रूट पर अतिरिक्त सुरक्षा मानक लागू किए जा सकते हैं। फिलहाल सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, जिससे प्रशासन और यात्रियों के परिजनों ने राहत की सांस ली है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में मौसम का दोहरा असर, देहरादून-हरिद्वार में लू का अलर्ट तो पहाड़ों में बारिश के आसार देहरादून के पैनेसिया अस्पताल में भीषण आग, महिला मरीज की दर्दनाक मौत