Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 21 जनवरी 2026देहरादून में वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 172 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। ठंड के मौसम में बढ़ती धुंध, वाहनों से निकलने वाला धुआँ और निर्माण गतिविधियों के कारण हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ी हुई पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में श्वसन संबंधी समस्याएँ और बढ़ सकती हैं।राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस स्तर का AQI विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है। शहर के कई इलाकों में सुबह और शाम के समय धुंध अधिक देखी गई, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हुई। स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ी हैं।पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में तापमान कम होने से हवा की ऊर्ध्वाधर गति कमजोर पड़ जाती है, जिससे प्रदूषक कण नीचे ही फँसे रहते हैं। देहरादून घाटी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इसके साथ ही, बढ़ता ट्रैफिक, डीज़ल वाहनों का धुआँ, खुले में कचरा जलाना और निर्माण स्थलों से उड़ती धूल भी वायु गुणवत्ता को खराब करने में बड़ी भूमिका निभा रही है।स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अनावश्यक रूप से सुबह और देर शाम खुले में घूमने से बचने, मास्क का उपयोग करने और घरों में वेंटिलेशन बनाए रखने की अपील की गई है। अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को नियमित दवाइयाँ साथ रखने और किसी भी असहजता की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने को कहा गया है। बच्चों को खुले मैदानों में लंबे समय तक खेलने से फिलहाल बचाने की सलाह भी दी गई है।प्रशासन स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। संबंधित विभागों को निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय सख्ती से लागू करने, कचरा जलाने पर रोक लगाने और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में वृद्धि और हरित क्षेत्रों का विस्तार जरूरी है।पर्यावरणविदों ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, कचरा न जलाने और अधिक से अधिक पौधरोपण करने से प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में देहरादून की हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।दैनिक प्रभातवाणी नागरिकों से अपील करता है कि वे स्वास्थ्य संबंधी सलाहों का पालन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएँ, ताकि देहरादून की स्वच्छ और शांत पहचान को सुरक्षित रखा जा सके। Post Views: 15 Post navigationटिहरी में राष्ट्रीय राजमार्ग‑34 भूस्खलन के कारण 19 जनवरी से 1 फरवरी तक बाधित बिजली दरों में बदलाव का प्रस्ताव, 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू करने की तैयारी