पीएम मोदी ने डाट काली मंदिर में की संकल्प पूजा, एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद लिया मां का आशीर्वाद
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पीएम मोदी ने डाट काली मंदिर में की संकल्प पूजा, एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद लिया मां का आशीर्वाद

देहरादून में आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में विकास और आस्था दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी देहरादून स्थित प्रसिद्ध डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मां डाट काली का ध्यान लगाया और राष्ट्र की समृद्धि, नागरिकों के स्वास्थ्य तथा देश के विकास के लिए विशेष संकल्प लिया। यह पूरा आयोजन धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास परियोजनाओं के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

देहरादून में स्थित Daat Kali Temple को क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी का स्थान माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी बड़े निर्माण, यात्रा या शुभ कार्य से पहले यहां देवी का आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ होता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम के बाद सीधे मंदिर पहुंचकर पूजा की।

वहीं देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंदिर परिसर में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा की और लगभग कुछ मिनटों तक ध्यान मुद्रा में भी रहे। इस दौरान उन्होंने मां के समक्ष “संकल्प पूजा” की, जिसमें राष्ट्र के कल्याण, नागरिकों की सुख-शांति और देश के विकास कार्यों की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा गया।


एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री

दिन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया, जिसे उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे से राजधानी दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री सीधे देहरादून स्थित डाट काली मंदिर पहुंचे, जहां पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था और पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। मंदिर परिसर में स्थानीय परंपराओं के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विधि-विधान से पूजा स्थल तक ले जाया गया।


संकल्प पूजा में राष्ट्र कल्याण की कामना

डाट काली मंदिर में आयोजित इस विशेष पूजा को “संकल्प पूजा” के रूप में संपन्न किया गया। मंदिर के पुजारियों के अनुसार इस पूजा का उद्देश्य किसी विशेष कार्य को प्रारंभ करने से पहले ईश्वर से आशीर्वाद लेना होता है।

पूजा के दौरान प्रधानमंत्री ने मां डाट काली के समक्ष देश की एकता, शांति और समृद्धि के लिए संकल्प लिया। साथ ही उन्होंने नागरिकों के स्वस्थ जीवन और राष्ट्र के विकास कार्यों के सफल क्रियान्वयन की कामना की।

पूजा के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर में फल, फूल और पारंपरिक वस्त्र अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक मंदिर परिसर में ध्यान भी लगाया, जिसे उपस्थित लोगों ने अत्यंत आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण क्षण बताया।


पुजारी ने बताया पूजा का पूरा अनुभव

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित बिजेंद्र थपलियाल ने बताया कि यह उनके जीवन का अत्यंत अविस्मरणीय क्षण रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पूजा पूरी तरह परंपरागत विधि के अनुसार संपन्न कराई गई।

पुजारी के अनुसार उन्हें पहले ही प्रशासन की ओर से सूचना मिल गई थी कि प्रधानमंत्री मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद पूजा की विधि, समय और संकल्प प्रक्रिया को पहले से निर्धारित कर लिया गया था, ताकि सभी परंपराओं का सही ढंग से पालन हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि सनातन परंपरा में किसी भी बड़े कार्य की शुरुआत से पहले स्थानीय आराध्य देवी या देवता का आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। डाट काली मंदिर इस क्षेत्र की प्रमुख आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां पूजा करना एक महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है।


डाट काली मंदिर का धार्मिक महत्व

डाट काली मंदिर देहरादून का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

मान्यता है कि यह देवी देहरादून क्षेत्र की रक्षक शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार किसी भी नए निर्माण कार्य, सड़क परियोजना या बड़े विकास कार्य से पहले यहां देवी का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।

इसी कारण दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बाद प्रधानमंत्री का यहां पूजा करना परंपरा और आधुनिक विकास के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण भी किया

मंदिर दर्शन से पहले प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे के 18 किलोमीटर लंबे वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर का भी निरीक्षण किया। यह कॉरिडोर वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, ताकि सड़क निर्माण से उनके प्राकृतिक आवास पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

इस परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का एक उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की नई दिशा तय करेगा।


उत्तराखंड में विकास और आस्था का संगम

आज का दिन उत्तराखंड के लिए केवल एक राजनीतिक या विकासात्मक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह आस्था और विकास के संगम का प्रतीक बन गया। एक ओर जहां एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजना राज्य को नई आर्थिक दिशा दे रही है, वहीं दूसरी ओर डाट काली मंदिर में की गई पूजा ने स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान दी है।

देहरादून और पूरे उत्तराखंड में इस दौरे को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं राज्य की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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